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कैथल में जीर्णोद्धार को तरसा भाई उदय सिंह किला, मुख्य द्वार बंद, पर्यटन स्थल बनने की आस क्षीण

जिले के इतिहास में भाई उदय सिंह किले का अपना एक अलग महत्व है। इस पर केवल बाहरी सुंदरीकरण करने के अलावा अन्य प्रकार से इसे विकसित नहीं किया गया है। हालांकि वर्ष 2013 में इस किले का जीर्णोद्धार तो हुआ, लेकिन यह जीर्णोद्धार केवल बाहर से दिखने तक ही सिमट कर रह गया। किले के अंदर कोई कार्य नहीं करवाया गया, जिससे इस स्थान को पर्यटन के रूप में विकसित करवाया जा सके। शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। जिला प्रशासन की ओर से भी यदि कोई भव्य कार्यक्रम आयोजित करना होता है तो उसे यहां आयोजित करवाया जाता है। पिछले तीन वर्षाें से गीता जयंती पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम भी इसी स्थान पर आयोजित हो रहा है। इतिहासकारो के अनुसार भाई उदय सिंह का किला 1570 ई. में अकबर के काल में बना था। इसे अकबर ने सेना के लिए बनवाया था। इसके बाद सन् 1747 में सिखों का राज स्थापित हुआ था। जिसमें सिख शासक देसू सिंह ने इस क्षेत्र पर जीत हासिल करके कैथल को अपनी राजधानी बनाया था। उनके सुपुत्र लाल सिंह ने इस विरासत को संभाले रखा। उनके सुपुत्र लाल सिंह के पोते भाई उदय सिंह ने इसका विस्तार करनाल और जींद तक कर लिया था। किले के साथ भाई उदय सिंह ने किला के पास अपना महल भी बनवाया, जो वर्तमान में पुराना एसडीएम कार्यालय है। भाई उदय सिंह के पास कोई संतान नहीं थी। वर्ष 1823 में उन्होंने राजकाज संभाला इसके बाद उनकी 1843 में मृत्यु हो गई। इसके बाद इस किले के कारण कैथल को अंग्रेजों ने अपनी रियासत में शामिल कर लिया था।

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