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जींद में मानवाधिकार आयोग की टीम पहुंची दस बांग्लादेशियों को मिली रिहाई

हरियाणा मानवाधिकार आयोग की टीम के सोमवार को जिला जेल के निरीक्षण को मध्य नजर रखते हुए आनन-फानन में रविवार रात को एक पुलिस निरीक्षक के नेतृत्व में इन दस बांग्लादेशियों को भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के हवाले करने के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने करीब दो साल पहले दस बांग्लादेशियों को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसमें तीन महिलाएं भी शामिल थी। गिरफ्तार किए गए दस लोगों में दो दंपती थे। इनमें मोहम्मद सुहाग एवं उनकी पत्नी शेफाली अख्तर, मोहम्मद आलमगीर एवं उनकी पत्नी शरमीन अख्तर, मोहम्मद यूसुफ, अब्दुल आफताब, मोहम्मद रूबल राणा, अरशद अली, मोहम्मद दुलाल हुसैन, सोनिया (लड़की) शामिल थे। इन सभी लोगों को अदालत ने अवैध रूप से भारत में रहने के मामले में दो साल की कैद की सजा सुनाई थी। यह सजा दिसंबर में पूरी हो चुकी थी लेकिन इसके बावजूद यह सभी जींद जेल में बंद थे। मानव अधिकार आयोग की टीम आने की सूचना के बाद जेल प्रशासन जब रविवार को अपने सिस्टम को जांच रहा था, तब जेल अधिकारियों को पता चला कि यहां पर दस बांग्लादेशी सजा पूरी होने के बावजूद जेल में बंद है। जैसे ही जेल अधिकारियों को इस बात की भनक लगी उन्होंने तुरंत इन्हें डिपोर्ट करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधना शुरू किया। रात होते-होते इन्हें जींद से रवाना कर दिया गया। जेल के अधिकारियों का मानना था कि यदि मानवाधिकार आयोग के सामने यह मामला आया तो उन्हें मानवाधिकार आयोग की खरी खोटी सुनाई पड़ सकती है, इसीलिए जेल प्रशासन ने इन लोगों को देर रात ही कोलकाता के लिए रवाना कर दिया। इस मामले की जांच करेंगे : ललित बत्रा इसमें कुछ प्रीवेंटिव बात रही हो, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि आयोग इस मामले की जांच करेगा। यदि जांच में कहीं पर पुलिस अधिकारियों या जेल प्रशासन की कोई लापरवाही सामने आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -ललित बत्रा, अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग बांग्लादेश में चुनाव की वजह से हुई देरी : जेल उपाधीक्षक दस बांग्लादेशियों की सजा 24 दिसंबर को पूरी हो गई थी। उसके बाद आव्रजन नियमों के तहत प्रक्रिया शुरू की गई थी। ऐसे मामलों में इन लोगों के परिवार से संपर्क किया जाना होता है और पिछले दिनों बांग्लादेश में चुनाव होने के चलते इसमें काफी समय लग गया। इसीलिए इनको डिपोर्ट करने में समय लगा है। -सुरेंद्र, उपाधीक्षक, जिला जेल जींद।

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