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जींद: जिला परिवेदना समिति की बैठक में डीसी ने सुनी 15 शिकायतें, आठ का मौके पर हुआ निपटारा

जिला परिवेदना समिति में आई शिकायतों को निपटाने के लिए विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं है। इसका उदाहरण बुधवार को हुई जिला परिवेदना समिति की बैठक में दिखा। इसमें एक्साइज विभाग ने एक शिकायत को निपटाए बिना ही समझौता दिखा दिया। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने नगूरां व अमरगढ़ गांव में अवैध शराब बिक्री पर सख्ताई से पेश आए। इसमें शिकायकर्ता को पूछा तो उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारी दिन में आए थे। शराब शाम को बिकती है। उस समय कोई दौरा नहीं किया जाता, जबकि एक्साइज विभाग डीईटीसी ने बताया कि वहां पर कोई ऐसा खुर्दा नहीं मिला। जिसमें शराब बिक रही हो। इस पर डीसी ने एक्साइज विभाग के अधिकारियों को चेताया कि परिवेदना समिति का उद्देश्य है कि लोगों की शिकायत निपटाई जाए। शिकायतकर्ता ने कहा कि साहब आकर देखोगे तो इन स्थानों पर आज भी सरेआम शराब बिकती है। इस पर डीसी ने अगली बैठक तक इस शिकायत को लंबित में रकखर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा एक शिकायत में सीआरएसयू की छात्रा रिचा भंडारी ने आरोप लगाया कि परीक्षा परिणामों में कुछ अधिकारी व कर्मचारी धांधली कर रहे हैं। जिन विद्यार्थियों ने कभी कक्षा भी नहीं लगाई और असाइनमेंट भी जमा नहीं करवाई। उनके अंक अधिक लगाए जा रहे हैं, जबकि वह निरंतर कक्षाएं लगा रही है। उनके अंक कम लगाए गए हैं। इस मामले की जांच के लिए डीसी ने एडीसी व ग्रेवेंसिज कमेटी के दो सदस्यों को शामिल करके जांच के निर्देश दिए। इसके अलावा बैठक में 15 शिकायत सुनी गई। इनमें से आठ का समाधान मौके पर ही करवाय दिया गया। शेष सात मामलों पर डीसी ने संबंधित अधिकारियों को अगली बैठक तक जांच पूर्ण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में शामिल नहीं होने वाले विभागीय अधिकारियों पर डीसी ने सख्ती दिखाई और कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह, एडीसी विवेक आर्य, एसडीएम जींद सत्यवान मान, एसडीएम नरवाना जगदीश चंद्र, एसडीएम सफीदों पुलकित मल्होत्रा, एसडीएम उचाना दलजीत सिंह, एसडीएम जुलाना होशियार सिंह, डीएमसी सुरेन्द्र दुहन समेत सभी प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। विजय कुमार निवासी शास्त्री नगर नजदीक पुरानी काठमंडी ने लेबर विभाग से कन्यादान न मिलने की शिकायत रखी। इस पर एडीसी व गैर- सरकारी सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने डीसी को बताया कि ये व्यक्ति विभाग से कन्यादान के पात्र थे। उस समय पोर्टल नहीं चल रहा था। इसके कारण वह आवेदन नहीं कर सके। डीसी ने एडीसी को कहा कि वह इसका केस बनाकर सरकार के पास भेजे, ताकि शिकायतकर्ता को इस योजना का लाभ दिया जा सके।

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