एसीपी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि आप बच्चे ही देश का भविष्य हैं। यदि युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाता है तो देश प्रगति नहीं कर सकता। नशा शरीर को अंदर से कमजोर कर देता है, मानसिक संतुलन बिगाड़ देता है और परिवार एवं समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। वह वीरवार को द हाईट्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अमर उजाला की तरफ से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। स्कूल निदेशक नविंद्र कुमार ने एसीपी सुरेंद्र कुमार का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने एसीपी सुरेंद्र कुमार से साइबर और यातायात को लेकर प्रश्न पूछे, जिनका जवाब पाकर उनकी शंका दूर हुई। एसीपी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि नशा न केवल शरीर को खोखला करता है बल्कि परिवार की नींव हिला देता है और समाज में अपराध को जन्म देता है। नशे से बड़ा कोई दुश्मन नहीं। जब युवा नशा मुक्त होंगे, तभी समाज भयमुक्त और खुशहाल बनेगा। झज्जर पुलिस ने ठान लिया है कि अब नशे की जड़ तक जाकर उसे खत्म किया जाएगा। हमारे युवा नशे की गिरफ्त से निकलकर शिक्षा, सेवा और खेल की राह पर आगे बढ़ें, यही पुलिस का ध्येय है। उन्होंने कहा कि आज साइबर ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, किसी कॉल पर अपनी निजी जानकारी न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। 24 घंटे में इसकी जानकारी देने पर आपका पैसा वापस मिल जाएगा। यदि बिना ओटीपी दिए आपके खाते से पैसा कटता है तो उसकी जिम्मेदारी बैंक की होगी। बैंक आपको किसी भी तरह वह राशि वापस करेगा। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना ही असली समझदारी है। हेलमेट और सीट बेल्ट को आदत बनवाए। ओवरस्पीड और गलत लेन से बचना चाहिए। सीट बेल्ट और हेलमेट पहनना जीवन सुरक्षा का मूल आधार है। ट्रैफिक नियमों का पालन करना हर नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि एक छोटी-सी लापरवाही बड़े हादसों का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि 18 साल के युवाओं का लाइसेंस बनता है, इसलिए आप स्कूटी के लाइसेंस बनवाएं। इस अवसर पर दिनेश कुमार, हरिओम, अनीता, विकास कुमार, सपना, मोनिका, संतोष, ज्योति मौजूद रहे। बच्चों को दिलाई शपथ इस अवसर पर स्कूल निदेशक नविंद्र कुमार ने बच्चों से अपील की कि यातायात नियमों का पालन करें, नशे से दूर रहे। यदि कोई नशा करता है तो उसकी सूचना पुलिस को दें। साइबर ठगी से केवल जागरूकता से ही बचा जा सकता है। इस दौरान उन्होंने यातायात नियमों का पालन करने, नशा नहीं करने की शपथ भी विद्यार्थियों को दिलाई।