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झज्जर: बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरे कर्मचारी, सरकार के फैसले के विरोध में किया प्रदर्शन

झज्जर। बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने बुधवार को प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विभाग के कर्मचारी पहले बिजली विभाग परिसर में एकत्रित हुए और वहां से विरोध मार्च निकालते हुए झज्जर के लघु सचिवालय पहुंचे। कर्मचारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपकर निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि बिजली विभाग का निजीकरण केवल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ नहीं है बल्कि इसका सीधा असर किसानों और आम जनता पर भी पड़ेगा। कर्मचारी नेता विजय हुड्डा का आरोप है कि सरकार निजी कंपनियों और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग का निजीकरण करना चाहती है। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण होने पर बिजली सेवाएं महंगी हो सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों सहित किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम जनता और किसानों को साथ लेकर राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा और किसी भी कीमत पर बिजली विभाग का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने घोषणा की कि बिजली विभाग के कर्मचारी 11,12 और 13 अगस्त को हड़ताल पर रहेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी और आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने भाग लिया और निजीकरण के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और विभाग को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने की मांग की।

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