परिवार पहचान पत्र लोगों के लिए परेशानी पहचान पत्र बन गया है। अमर उजाला टीम ने डीसी के समाधान शिविर में पहुंच कर व्यवस्था को देखा तो पता लगा कि कुल 40 लोग शिकायत लेकर आए तो उसमें 29 लोग पीपीपी की समस्या लेकर आए थे। बारह क्वार्टर एरिया से आए अमित न बताया कि पांच महीने पहले मेरे पिता बलराम का निधन हो गया। पहले पिता का नाम पीपीपी से कटवाने के लिए दो महीने तक चक्कर लगाता रहा। बाद में नाम काट दिया तो मेरी मां कृष्णा की विधवा पेंशन नहीं बना रहे। मेरी मां को फैमिली आईडी में अविवाहित दिखा दिया है। इसी फैमिली आईडी में मेरी मां के बेटा, बहू, पौती भी दिखाई है। जिस महिला के बच्चे, पोता- पोती हों वह अविविवाहित कैसे हो सकते हैं।दस बार समाधान शिविर में आ चुका हूं। चार बार सीएससी से रिक्वेस्ट लगा चुका है। हर बार कहते हैं कि हमारे पास समाधान नहीं है। जब समाधान नहीं कर सकते तो क्यों शिविर लगा रहे हैं। समाधान शिविर बंद क्यों नहीं देते। दूसरे प्रदेशों पीपीपी नहीं तो हरियाणा में इसे क्यों थोंपा गया है। पीपीपी को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए निर्देश के अनुसार सर्वे हुआ था । पीपीपी को लेकर अधिकतर लोग आय कम कराने के लिए ही आते हैं। आय का सत्यापन हम नहीं करते। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर तय निर्देशों के अनुसार एक पूरी टीम होती है। कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम आती हैं तो हम रिक्वेस्ट भेजते हैं। रिकॉर्ड ठीक होने में कुछ समय तो लगता है। -अभिषेक बंसल, जिला अधिकारी, क्रीड।