हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएस एचएयू) में छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हॉस्टल और कैंटीन बंद करने के बाद छात्रों ने धरना स्थल पर ही लंगर की व्यवस्था शुरू कर दी है। छात्र अब खुद खाना तैयार कर रहे हैं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग मिल रहा है। धरना स्थल पर खाना बनाने, वितरण करने और बर्तन धोने जैसे कार्यों के लिए छात्रों ने अलग-अलग समूह बनाए हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर लड़के और लड़कियों के हॉस्टल की कैंटीन बंद कर दी और गुरुवार रात को छात्राओं को हॉस्टल में खाना देने से रोक दिया गया। छात्रों ने यह भी दावा किया कि प्रशासन ने छात्राओं को धरना स्थल पर आने से रोका, जिसके बाद रात को धरना स्थल और हॉस्टल के बाहर नारेबाजी की गई। हॉस्टल खाली करने के आदेश, छात्रों का विरोध विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार सुबह छात्रों को हॉस्टल खाली करने के आदेश जारी किए, जिसे छात्रों ने तानाशाही करार दिया। छात्रों का कहना है कि प्रशासन इस हथकंडे से उनका आंदोलन कमजोर करना चाहता है। उनका मानना है कि हॉस्टल खाली होने से खासकर छात्राओं को दिक्कत होगी, क्योंकि उनके अभिभावक उन्हें हॉस्टल के अलावा कहीं और ठहरने की अनुमति नहीं देंगे। इससे कई छात्र घर लौटने को मजबूर होंगे, जिससे आंदोलन की ताकत कम हो सकती है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान हर साल एक महीने तक शैक्षणिक गतिविधियां बंद रहती हैं और इस दौरान हॉस्टल खाली करवाकर मरम्मत कार्य किया जाता है। जिला प्रशासन की अपील जिला प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि सरकार और प्रशासन ने अभिभावक की तरह छात्रों से बातचीत की है ताकि उनके भविष्य पर कोई आंच न आए। प्रशासन ने कहा कि शैक्षणिक पाठ्यक्रम की परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में 9,094 उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर है। प्रशासन ने छात्रों से पढ़ाई पर ध्यान देने और आंदोलन खत्म करने की अपील की।