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हिसार के ओमप्रकाश ने सुनाई आजादी की कहानी, बोले- अंग्रेज उन्हें प्रताड़ित करने के लिए जेल में खाने में चूना मिला कर खिलाते थे

हिसार। मेरे पिता तुलसीराम का जन्म 30 नवंबर 1922 को गांव डोभी में हुआ। 30 नवंबर 1938 को वह आर्मी में जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। वह बरेली में जाकर भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 7 साल आर्मी में रहकर डयूटी की। इसके बाद व आईएनए में शामिल होने के लिए सिंगापुर पहुंचे।अंग्रेंजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेज उन्हें प्रताड़ित करने के लिए जेल में खाने में चूना मिला कर खिलाते थे। जिससे वह पेचिस होकर कमजोर पड़ जाएं तथा उनकी मौत हो जाए। आजाद हिंद फौज में भर्ती रहने के दौरान लंबे समय जंगलों में छिपते रहे। इस दौरान उन्होंने काफी समय तो बांस की गोलियां खाकर बिताया। वहां के जंगलों में खाने के लिए कुछ और नहीं होता था तो मजबूरी में इसे खाते थे। लड़ाई के समय लंबे समय बारिश होती रहती थी। उनके पास बचने के लिए किसी तरह के संसाधन नहीं होते थे। हम चार भाई हैं तथा दो बहन हैं। मैं टेलरिंग का काम करता हूं। मेरे दो भाई ड्राइवरी का काम करते हैं। एक भाई खेती बाड़ी का काम करता है। दसवीं पासबा होने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिली। मैंने काफी बार नौकरी के लिए प्रयास किया। हमें किसी तरह की कोई पेंशन या मदद नहीं मिल रही। हमें अंग्रेजी सरकार के समय भी ताम्र पत्र मिला थ। इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय भी ताम्र पत्र दिया गया।

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