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फतेहाबाद के टोहाना में कम्युनिस्ट पार्टी का मांगो को लेकर प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम दिया एसडीएम को दिया ज्ञापन

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)की जिला कमेटी द्वारा शहर के लघु सचिवालय परिसर में लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा करने व अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान अपनी मांगो को लेकर राष्ट्रपति के नाम एसडीएम टोहाना को लिखित ज्ञापन दिया गया। पत्रकारों से बातचीत में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जिला सचिव जगतार सिंह ने बताया कि इस साल बिहार में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को लेकर विशेष गहन पुन निरीक्षण (एस आई आर) किया जा रहा है, ऐसा करने से पहले राजनीतिक पार्टियों से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया और ना ही बताया गया। उन्होंने कहा कि गहन पुननिरक्षण के बहाने एन आर सी को लागु करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है जो चुनाव आयोग के कार्यक्षेत्र में नहीं है। इस दौरान अनाप- शनाप शर्ते रखी गई हैं जिनके लागु होने से बड़ी संख्या में लोग वोट के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। इसमें ज्यादातर गरीब, निरक्षर, प्रवासी मजदूर प्रभावित होंगे और उनके लिए नागरिक पहचान का भी संकट खड़ा कर दिया जाएगा। यह देश के संविधान में लोगों को दिए गए लोकतान्त्रिक अधिकारों का उलंघन है, अभी हाल ही में महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा अति वामपंथी, उग्रवाद के नाम पर जन सुरक्षा अधिनियम लाया गया है जिसके तहत बिना किसी आरोप के किसी को भी पकड़ कर जेल में डाला जा सकता है और उसका बैंक खाता फ्रिज किया जा सकता है। इस कानून को सरकार से असहमति रखने वाले लोगों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा जो पूरी तरह से लोकतान्त्रिक अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि तीसरी मांग में देश के अलग -अलग क्षेत्रों गुरुग्राम, रोहतक, दिल्ली पर रह रहे बंगाली भाषा बोलने वाले मुस्लिम लोगों सहित अन्य लोगों को पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, उनको थाने में बुलाकर पीटा जाने, पैसे ऐंठने, कागजात दिखाने के बाद ना देने, अपमानित करने के चलते प्लायन करने पर मजबूर हैं l उन्होंने कहा कि यह संविधान की 8 वीं सूची में बंगाली भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा होने के बाद भी देश के नागरिकों को भाषा के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है, जो संवैधानिक व मानवीय अधिकारों का घोर उलंघन हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारें संवैधानिक व मानवीय अधिकारों के दायित्व का निर्वाह नहीं कर रही है।

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