तीन गांवों के पशुओं का उपचार करने के लिए रावलधी गांव में बनाया गया पशु अस्पताल खुद बीमार पड़ा है। यहां व्यवस्थाएं बेपटरी हैं जबकि मूलभूत सुविधाओं की कमी है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि यहां गेट लगा है और न ही चहारदीवारी है। इनके कारण यहां लावारिस पशु डेरा डाले रहते है। दूसरी ओर, पशुपालन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। बता दें कि गांव रावलधी पशु अस्पताल में रावलधी के अलावा कमोद व मिर्च गांव के पशुपाल भी पहुंचते हैं। तीन गांवों के पशुओं के लिए बने अस्पताल परिसर में झाड़ियां उगी हैं जबकि गंदगी की भरमार है। पशुपालक हरिया, सीताराम, मोहन और ईश्वर सिंह का कहना है कि विभाग का अस्पताल के रख-रखाव की तरफ ध्यान नहीं है और इसके चलते कई लोग तो यहां शौच आदि कर जाते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पशु अस्पताल की सुध लेने की मांग की है, ताकि पशुपालकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। दरअसल, शहर के साथ लगते गांव रावलधी में पशु अस्पताल का निर्माण करीब 15 साल पहले करवाया गया था। इसका लाभ रावलधी के साथ दो और गांवों के लोगों को मिला। अब लंबे समय से अस्पताल विभाग की उपेक्षा का शिकार है और इसके चलते यहां सुविधाओं का अभाव होने से पशुपालकों ने तो आना तक छोड़ दिया है। वहीं, विभाग की ओर से अब तक यहां बनीं अव्यवस्थाओं को दूर नहीं कराया गया है।