इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा सरकार के सादगी (खर्च में कटौती) और ऊर्जा संरक्षण के हालिया आदेशों को केवल दिखावा बताया है। बीजेपी सरकार फिजूलखर्ची कम करने और ऊर्जा की बचत करने की बात कहकर मित्त व्यतत्ता का उपदेश देती है। बीजेपी सरकार एक तरफ सरकार विभागों को खर्च कम करने, बिजली बचाने और हमें रैली और जनसभा न करने की सलाह दे रही है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद अनावश्यक और फिजूलखर्ची को बढ़ावा दे रही है। 8-10 जून तक कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के कार्यक्रम के आयोजन में प्रतिनिधियों व अधिकारियों के ऊपर चंडीगढ़ के फाइव-स्टार होटलों में करोड़ों रुपये खर्च किए। उन्होंने पूछा कि जब सरकार सादगी का उपदेश दे रही है, तो क्या इस तरह का खर्च उचित है। इस दौरान पूर्व डीजीपी एमएस मलिक, कार्यालय सचिव नछत्तर सिंह मलहान, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सतबीर सैनी और किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष फूल सिंह मंजूरा मौजूद रहे। प्रो. संपत सिंह ने सुझाव दिया कि सरकार को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय ओम प्रकाश चौटाला द्वारा अपनाए गए तरीके की तरह, मंत्रियों के स्टाफ और व्यवस्था का आकार छोटा करके अपना खर्च कम करना चाहिए। बीजेपी सरकार 15 मंत्रियों की जगह 9 मंत्रियों से भी काम चला सकती है। उन्होंने सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने वाले सलाहकारों और अधिकारियों की बड़ी संख्या को कम करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में लाखों प्रतिभाशाली और शिक्षित युवा गंभीर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त और पसंदीदा आईएएस अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार दिया जा रहा है और आकर्षक पदों पर फिर से नियुक्त किया जा रहा है। अधिकारियों को 2 से 3 सरकारी आवास और गाडिय़ां मिली हुई है। बीजेपी सरकार रिटायर्ड आईएएस की शरणस्थली बनी हुई है। इन नियुक्तियों से राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जबकि बेरोजगार युवा आर्थिक और मानसिक तनाव झेलते रहते हैं। अगर सरकार खर्च कम करना चाहती है तो ऐसे अधिकारियों को सेवा मुक्त कर घर भेज दे।