देश की अति प्रतिष्ठित आईआईटी मुंबई से बीटेक करके अभय ने सपनों की बड़ी उड़ान भरी थी। कोरोना की भयावह आपदा में उन्हें घर की ऐसी याद सताई कि वे कनाडा की नौकरी हमेशा के लिए छोड़ आए। कठिन दौर में ऐसा दार्शनिक ज्ञान हो गया कि देश लौटकर नौकरी ही नहीं की। कुछ वक्त फोटोग्राफी की। फिर देशाटन पर निकलकर केरल घूम आए। कहीं चैन नहीं पाया तो काशी (वाराणसी) चले गए। 2023 में यहीं अपने गुरुजी से मिले और मोह-माया के बंधन से मुक्त मानकर घरवालों से हमेशा के लिए दूरी बना ली। उनका कभी हाल चाल तक न लिया। 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में उनके क्रियाकलापों ने सुर्खियां पाईं तो घरवाले भी उनके नए रंग-रूप और सफर से वाकिफ हुए।