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हरियाणा BJP में बदले जातीय समीकरण,अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर साधा नया वोट बैंक

Sat, 30 May 2026 05:50 PM IST
Chandra Prakash Neeraj Video Desk Amar Ujala Dot Com

हरियाणा की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। भाजपा ने पिछले एक दशक में इन्हीं समीकरणों को अपने पक्ष में ढालने की रणनीति अपनाई है। 2014 में जब भाजपा ने पहली बार राज्य की सत्ता हासिल की, तब उसने जाट बनाम गैर-जाट के संतुलन पर ध्यान केंद्रित किया। उस समय सुभाष बराला और बाद में ओमप्रकाश धनखड़ जैसे जाट नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जाट मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। हालांकि समय के साथ यह रणनीति बदलती गई। 2023 के बाद भाजपा ने स्पष्ट रूप से गैर-जाट वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए और पिछड़ा वर्ग से लेकर ब्राह्मण और अब वैश्य समुदाय तक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया। कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद व मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पिछड़ा वर्ग से आते हैं। पार्टी ने 2023 में पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। उसके बाद ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मोहन लाल बड़ौली और अब डॉ. अर्चना गुप्ता को वैश्य समुदाय से प्रदेश अध्यक्ष बनाना, इस बात का संकेत है कि भाजपा जातीय राजनीति को एक स्थिर ढांचे की बजाय एक गतिशील रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि चुनावी गणित से जुड़ा हुआ है, क्योंकि गैर-जाट समुदाय हरियाणा में भाजपा का मुख्य आधार माना जाता है।

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