टांगरी नदी में अचानक 25 हजार क्यूसेक पानी आने से अंबाला कैंट की तटीय कॉलोनियों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। गलियों और घरों में पानी घुसता देख लोगों का सब्र टूट गया, जिसके बाद आक्रोशित निवासियों ने टांगरी बांध रोड पर जाम लगा दिया। इस दौरान महिलाओं ने सड़क के बीचों-बीच धरना दिया, जिससे एसडीएम और नगर परिषद के ईओ की गाड़ियां करीब आधे घंटे तक फंसी रहीं। प्रशासन और स्थानीय पार्षद हरमिंदर सिंह हीरा के बीच-बचाव के बाद जाम खोला जा सका। इस दौरान लोग काफी आक्रोशित नजर आए। टांगरी की जद में आने वाली करीब 40 कॉलोनियों के निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने नदी को दोनों तरफ से गहरा करने की गुहार लगाई थी, लेकिन प्रशासन ने दूसरी तरफ स्थित वैध कॉलोनियों (प्रभूप्रेमपुरा, ब्राह्मण माजरा और करधान) को बचाने के लिए केवल उधर ही खुदाई की। इसका खामियाजा आज 20 हजार से अधिक गरीब आबादी को भुगतना पड़ रहा है। लोग अपना सामान लेकर छतों और बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। मानसून की शुरुआत के साथ ही टांगरी नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की सांसें अटक गई हैं। हाल ही में प्रशासन की ओर से नदी की खोदाई करवाकर दावा किया गया था कि इस बार बाढ़ जैसे हालात नहीं बनेंगे और क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। मगर पहाड़ों से टांगरी नदी में आए महज 25 हजार क्यूसेक पानी ने ही इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। खोदाई में बरती गई लापरवाही के चलते चौड़ी नदी कई जगहों से संकरी हो गई है, जिससे पानी की धारा ने नया रास्ता पकड़ लिया है। अब बांध के दूसरी तरफ बसे महेश नगर सहित अन्य रिहायशी क्षेत्रों पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।