शहर के बाल भवन वाटिका में आयोजित चार दिवसीय स्वदेशी मेले का आयोजन किया। इस दौरान मेले में बनाई गई हरियाणवी कच्ची ढाणी ने लोगों को आकर्षित किया। इस कच्ची ढाणी को मिट्टी के लेप से तैयार कर ग्रामीण संस्कृति से लोगों को जोड़ने का प्रयास किया। ढाणी में लोगों के लिए गांवों की तरह खाट डाल कर देशी भोजन परोसा गया। वहींं, पास में ही कच्ची रसोई स्थापित की गई। जिसमें मिट्टी के चुल्हे बनाए गए और गांव की महिलाओं द्वारा बाजरा व मक्का की रोटी तैयार की जा रही थी। इस दौरान रसोई में भोजन तैयार करने के लिए देशी घी का प्रयोग किया। इस दौरान मिट्टी के बर्तन का प्रयोग किया गया। इसमें बाजरे की रोटी, मक्का की रोटी, सरसों का साग, कढी, लहसुन की चटनी, बिलोना घी और शक्कर,लस्सी 200 रुपये प्रति थाली के हिसाब से परोसी गई।