गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 14 आदिवासी आरक्षित पर वोटिंग हो चुकी है। अब सभी की निगाहें दूसरे चरण की उत्तर और मध्य-पूर्वी गुजरात की 13 आदिवासी सीटों पर टिकी हुई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने इन सीटों पर जमकर प्रचार भी किया। लेकिन आज भी आदिवासी समाज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करते हुए नजर आ रहे हैं। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव परिणाम के विश्लेषण से पता चलता है कि 2012 के चुनावों में इन 13 एसटी सीटों पर 70 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था। इनमें भाजपा को महज तीन और कांग्रेस को 10 सीटें हासिल हुई थीं। 2012 में पांच फीसदी से भी कम अंतर वाली तीन सीटें थीं। इसमें कांग्रेस ने दो और भाजपा ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। 2017 के विधानसभा चुनावों में इन 13 सीटों पर 67.85 फीसदी मतदान हुआ। इनमें भाजपा को 4 और कांग्रेस को 8 सीटें हासिल हुईं। जबकि एक सीट अन्य दल की जीत हुई। 2017 में पांच सीटों पर हार जीत का अंतर पांच फीसदी से भी कम था। जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों को दो-दो सीटें मिली थीं।