अमर उजाला दफ्तर में महिलाओं संग संवाद का आयोजन किया गया। विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं ने अपनी अपनी राय रखी। पिछले दिनों 10 वर्ष की मासूम संग हुए जघन्य कांड के बाद महिलाओं का मानना था कि किसी भी सुरक्षा के लिए लोग भाग के पुलिस के ही पास जाते हैं, लेकिन जब पुलिस ही ऐसा काम करेगी तो फिर चाहे बच्चे हों चाहे बड़े, कैसे उनके पास जाएंगे? मुझे लगता है कि पुलिस डिपार्टमेंट को इस चीज के बारे में अवेयर करना चाहिए कि कोई बच्ची हो या कोई महिला हो तो वो आप ही के पास जाएगी। लेकिन आपका नेचर ऐसा रहेगा तो सामने वाला कहाँ जाएगा? वहीं, रिपोर्टर रजनी के सवाल कि हमारे शहर में महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर क्या बदलाव होना चाहिए? इसपर एक महिला ने कहा कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर बहुत सारे बदलाव अभी जरूरी हैं। अभी महिलाएं जो हैं ना, वो आगे बढ़ रही हैं। लेकिन केवल भीड़ का हिस्सा बनने के लिए और जो बहाव आ रहा है उसके साथ बहने के लिए। ऐसे ही महिलाओं ने बारी-बारी अपने विचार रखे।