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नूंह में पंचायत: 'जब तक सीएम से वार्ता नहीं होगी निर्माण कार्य नहीं चलने देंगे', किसान नेता राकेश टिकैत ने दिया समर्थन

आईएमटी रोज़का मेव में अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से धरनारत किसानों ने बृहस्पतिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में एक पंचायत का आयोजन किया। जिसमें किसान नेता राकेश टिकैत समेत देश के तमाम बड़े किसान नेता उपस्थित हुए। पंचायत के दौरान किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी नौ मांगों पर मुख्यमंत्री के साथ बैठक नहीं होगी तब तक वे आईएमटी में चल रहे निर्माण कार्य को नहीं चलने देंगे। इस दौरान पंचायत में जिला प्रशासन की तरफ से एक बार नायब तहसीलदा, दो बार एसडीएम नूंह अंकिता पुवार व एएसपी आयुष यादव ने पहुंचकर किसानों से बातचीत की। आखिर में एसडीएम और एएसपी के आहवान पर किसानों का एक प्रतिनिधिमंड़ल उपायुक्त अखिल पिलानी व एसपी राजेश कुमार से बात करने नूंह पहुंंचा। चला आरोप-प्रत्यारोप का दौर: वर्ष 2010 से चल रहे किसानों के संघर्ष में साथ आते हुए पहली बार कांग्रेस विधायक आफताब अहमद भी शामिल हुए। क्योंकि कांग्रेस सरकार ने ही इन किसानों से कोर्ट में न जाने का हलफनामा लिया था और उस वक्त आफताब अहमद नूंह से विधायक थे। किसानों का आरोप है कि आफताब अहमद ने जानबूझकर उनके साथ सरकार से मिलकर धोखा करवाया था। पंचायत के दौरान मंच संचालक ने बार-बार वक्ताओं से आहवान किया कि वे पिछली बातों को ना दोहराए और एकजुटता दिखाते हुए इस लड़ाई को मिलकर लड़ें। लेकिन इसके बावजूद भी इनेलो जिलाध्यक्ष ताहिर हुसैन ने इस समस्या को कांग्रेस सरकार की देन बताया, तैयब हुसैन घासेडिया ने राकेश टिकैत व अन्य किसान नेताओं से आहवान किया कि वे इस लड़ाई में मेवात के किसानों का साथ दें। उन्होंने कहा कि मेवात की लीडरशिप इस लायक नहीं रही है कि वह इन किसानों को न्याय दिला सके। इस दौरान कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कांग्रेस सरकार द्वारा लिए गए हलफनामों को निरस्त करवाने का आहवान किया। बता दें कि वर्ष 2009 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रोजका मेव के साथ लगते नौ गांवों की 1600 एकड़ आईएमटी रोजका मेव के लिए अधिग्रहित की थी। किसानों ने सरकार पर मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए वर्ष 2010 से अनिश्चितकालीन धरना शुरु कर दिया। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ किसानों की मीटिंग हुई और मुआवजा बढ़ाने पर सहमति बनाते हुए किसानों से भविष्य में मुआवजा बढ़ोतरी के लिए कोर्ट का दरवाजा न खटखटाने का हलफनामा लिया गया। लेकिन किसानों को बढ़ाया हुआ मुआवजा नहीं दिया गया। इसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन फिर से जारी कर दिया, जिसका असर यह रहा कि इस आईएमटी में एक भी औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं हुई। भाजपा की सरकार आने के बाद किसानों के धरने को उठाया गया और जापान की लीथियम बैटरी बनाने वाली कंपनी को यहां जमीन देकर औद्योगिक इकाई स्थापित करने का काम दिया गया। एटीएल कंपनी ने अपना काम शुरु किया तो कई बार किसानों ने उसका निर्माण कार्य रुकवा दिया। जैसे-तैसे करके कंपनी का निर्माण कार्य पूरा हुआ और सितंबर माह में कंपनी को शुरु कर दिया गया। अब फिर से आईएमटी में चल रहे सड़क व अन्य निर्माण कार्याों को रुकवाने का आहवान धरनारत किसानों ने किया है। पंचायत में स्पष्ट कहा गया कि जब तक हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ उनकी वार्ता नहीं होगी तब तक निर्माण कार्य नहीं चलने दिया जाएगा। डीसी और एसपी ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया जब तक सीएम से मुलाकात नहीं होगी तब तक निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। इस पर उपायुक्त ने एचएसआईआईडीसी के प्रतिनिधि को बुलाकर सीएम से किसानों की मुलाकात तक निर्माण कार्य नहीं करने की हिदायत दी है। राकेश टिकाते ने मंच से घोषणा की कि धरना जारी रहेगा लेकिन निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। बाकी मांगों को लेकर सीएम के साथ बातचीत में आगे का रास्ता निकाला जाएगा।

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