साल 2020 में शुरू हुई भंगेल एलिवेटेड रोड आखिरकार पांच साल बाद आम जनता के लिए ट्रायल बेस पर खोल दी गई है। 608 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई 4.5 किलोमीटर लंबी इस सड़क से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत यह है कि समस्याएँ अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। एलिवेटेड रोड तो पूरी तरह तैयार होकर ट्रैफिक के लिए खोल दी गई है, लेकिन इसके नीचे की मुख्य सड़क बदहाल स्थिति में खड़ी है, जो लोगों की परेशानियां कम करने के बजाय बढ़ा रही है। नीचे की सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं, कई इलाकों में नालियों का पानी सड़क पर फैल रहा है, जबकि गंदगी और कूड़ा-कचरा महीनों से साफ नहीं किया गया। इसके अलावा मुख्य रोड पर रोज लगने वाला मार्केट भी ट्रैफिक का बड़ा कारण बनता है, खासकर शाम के समय जब सड़क पर दुकानों और ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में नीचे की सड़क पर जाम लगना आम बात है, जिसके चलते लोगों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पांच साल की मेहनत फिर भी नहीं मिली राहत अमर उजाला से बात करते हुए स्थानीय निवासी रामकुमार ने बताया कि पिछले पाँच साल से यह एलिवेटेड रोड बन रही थी, लेकिन इसके बावजूद भी लोगों को राहत नहीं मिली है। नीचे की सड़क की हालत बेहद खराब है। गड्ढे, कूड़ा और गंदगी की वजह से रोजाना जाम लगता है। ऑफिस जाने वाले लोग रोज लेट पहुंचते हैं और कोई सुनवाई नहीं होती। स्थानीय निवासी मनोज गोयल ने सवाल उठाया कि जब परियोजना पर 608 करोड़ खर्च किए गए और इसे पूरा करने में पाच साल लगे, तो नीचे की आधारभूत सुविधाओं को ठीक क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल ट्रायल शुरू हो चुका है, लेकिन व्यवस्था सुधारने के लिए नगर निकाय और प्राधिकरण की संयुक्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि सड़क का उपयोग सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।