नोएडा। समय बदल रहा है, लेकिन समाज की सोच अभी भी कई मामलों में पीछे छूटी हुई है। खासकर जब बात किशोरियों की महावारी जैसे संवेदनशील विषय की आती है, तो आज भी घरों में खामोशी का माहौल बना रहता है। 10–11 साल की उम्र में ही पीरियड्स शुरू होने लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकतर बच्चियां इस विषय पर अपने माता-पिता से खुलकर बात नहीं कर पातीं। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 20% पेरेंट्स ही इस विषय पर अपनी बेटियों से संवाद करते हैं, जिससे डर, संकोच और गलत धारणाएं लगातार बढ़ रही हैं। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ मीरा पाठक ने इस संबंध में जानकारी दीं।