ग्रेटर नोएडा पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश करने पर रिमांड के दौरान ही विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली (एलएडीसीएस) की ओर से कानूनी सहायता प्राप्त करने में असमर्थ लोगों की पहचान कर उनकी जमानत के लिए जरूरी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। गलत प्रकार से की गई गिरफ्तारी का विरोध जताया जा रहा है। ऐसा सात साल से कम की सजा वाले अपराध में किया जा रहा है। एलएडीसीएस गौतमबुद्धनगर के चीफ मनोज तेवतिया ने बताया कि नियम के तहत गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आरोपी के परिजन को सूचित करना होता है। लेकिन दूर दराज के इलाकों में रहने वाले आरोपी पक्ष के परिजन के लिए तुरंत आकर निजी वकील कर जमानती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना आसान नहीं होता है। इसलिए कोर्ट में रिमांड के दौरान ऐसे आरोपी की पहचान करके उनके परिजन को सूचना दी जाती है। फिर आरोपी पक्ष की सहमति से जमानत के लिए आवेदन किया जा चुका है। कई मामले में गलत तरीके से गिरफ्तारी कर लाए गए लोगों को जेल भेजने से पहले कोर्ट के समक्ष जरूरी आपत्ति जताई जाती है। प्रतिदिन दो से तीन ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिनके पास रिमांड के दौरान कोई अधिवक्ता नहीं होता है।