यदि आपके बच्चे का भी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा, घर में मारपीट व झगड़ा करता है, चीजें तोड़ता है, नशेड़ियों की तरह व्यवहार करता है, तो सावधान हो जाएं। बच्चे के दिमाग में डोपामाइन हार्मोन प्रभावित हो रहा है। इसका मुख्य कारण मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल करना और ऑनलाइन गेम खेलना है। मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों व युवाओं के लिए तेजी से एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। जिस तकनीक को शिक्षा और जानकारी का माध्यम माना गया था, वही अब मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है। चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण बच्चों के व्यवहार, सोच और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक असर पड़ रहा है। हालत यह है कि बच्चे किशोर और युवावस्था में ही आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। दरअसल, ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के दिमाग में डोपामाइन हार्मोन को असंतुलित कर रही है। डोपामाइन वह रसायन है जो खुशी और संतुष्टि से जुड़ा होता है। यह बच्चों व युवाओं में आकर्षण और प्रसन्नता पैदा करता है। इसके कारण उनमें न्यूरोट्रांसमीटर अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ज्यादा सक्रिय होने पर बच्चों व युवाओं को किसी भी चीज की लत लग जाती है और वे उसके आदी हो जाते हैं। लगातार गेम खेलने से दिमाग आभासी दुनिया की उत्तेजना का आदी हो जाता है, जिससे असल जीवन की गतिविधियां उसे नीरस लगने लगती हैं। परिणामस्वरूप बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और पारिवारिक बातचीत से दूर होने लगते हैं। यदि उन्हें वह वस्तु नहीं मिलती, तो वे पागलों व नशेड़ियों की तरह व्यवहार करने लगते हैं। घर में माता पिता, बहन भाई से लड़ाई झगड़ा करना, चीजें तोड़ना, मारपीट करना, पढ़ाई नहीं करना, चिड़चिड़ापन, अपने आप में खोए रहना जैसी स्थिति बन जाती है। बाद में कुछ मामलों में वे आत्मघाती कदम तक उठा लेते हैं।