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VIDEO : अब नहीं रहीं पद्मश्री शारदा सिन्हा, कभी नोएडा में अपनी आवाज से छठ की बढ़ाई थी छटा, अब वो सिर्फ यादों में

नोएडा के सेक्टर 21ए स्थित नोएडा स्टेडियम के रामलीला ग्राउंड में आयोजित छठ महोत्सव में स्वर्गीय शारदा सिन्हा पहली बार 2010 में यहां आईं थीं। इसके बाद वह कई बार नोएडा स्टेडियम में आयोजित प्रोग्राम में आ चुकी हैं। अपने गीतों से छठ में हमेशा चार चांद लगाए, पर जब वो आज नहीं रहीं तो वहीं अब बिहार समेत पूरे पूर्वांचल और छठ पर्व मनाने वाले लोगों में उनके जाने का दुख और मायूसी देखी जा सकती है। प्रवासी महासंघ के पदाधिकारियों। और सदस्यों ने उनके साथ जुड़ी पुरानी यादें भी शेयर की हैं। इसके पहले अमर उजाला ने उन्हें वर्ष 2015 में छठ के पहले दिन उनकी सुरीली आवाज अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कवर किया था। प्रवासी महासंघ के उपाध्यक्ष विकास तिवारी ने बताया कि वह देश की बड़ी लोकगायिका थीं, हम लोगों के बीच नहीं हैं, यह बहुत बड़ी क्षति है। भले उनके भजन काफी पुराने हो गए हों, लेकिन आज भी उनके भजन लोगों को मंत्र मुग्ध कर देते हैं उनकी खासियत थीं कि वह मंच पर बैठकर अधिकतर समय तक कार्यक्रम करती थीं, छठ महोत्सव को बढ़ाने के लिए उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है, प्रवासी महासंघ उनका हमेशा इस योगदान को याद रखेगा। समिति सदस्य राहुल द्विवेदी बोले कि स्वर्गीय शारदा सिन्हा जी के भजन के बिना छठ का पर्व अधूरा सा लगता है, वो अब नहीं रहीं, यह हम सभी बिहारियों समेत सभी पूर्वांचल के लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। जब वह नोएडा स्टेडियम आईं थीं तो उन्होंने अपनी मीठी भोजपुरी भाषा में भजन गाकर पूरे छठ की छटा को बढ़ा दिया था। वह हमसब के दिलों हमेशा रहेंगी। समिति के अध्यक्ष आलोक वत्स ने कहा कि नोएडा स्टेडियम में आयोजित छठ महोत्सव में वह 2010 में पहली बार आईं थीं। उसके बाद वह कई 6 7 बार आ चुकी हैं। उन्होंने भोजपुरी संगीत को अश्लीलता से परे ले जाकर भक्ति भरे गीतों से भोजपुरी गीतों को एक नई ऊंचाई तक ले गईं थी। धार्मिक उत्सवों में पिछले 20 वर्षों में कोई संगीत होता है जो लयबद्ध होते हैं वह शारदा सिन्हा के गाए हुए गीत ही होते हैं। वह बिहार की लता मंगेशकर थीं, उनका जाना हम सभी के लिए एक बड़ी क्षति है।

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