परिषदीय स्कूलों की मिशन कायाकल्प के तहत सूरत बदली जा रही है। वहीं, इंटर कॉलेज का प्रोजेक्ट अलंकार के तहत कायाकल्प किया जा रहा है, लेकिन जनपद के एडेड कॉलेज प्रोजेक्ट अलंकार अभियान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। तीन साल में 45 में से 9 कॉलेज ही प्रोजेक्ट अलंकार के तहत कार्य कराने के लिए राजी हुए हैं। जबकि करीब 70 प्रतिशत कॉलेज अभी तक दूरी बनाए हुए हैं। सरकार की ओर से 75 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद भी कॉलेज प्रबंधक आगे नहीं आ रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी कॉलेज प्रबंधक को समझाने में फैल साबित हो रहे हैं। कॉलेज की स्थिति सही नहीं होने के कारण छात्रों की उपस्थिति पर असर पड़ रहा है। कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर खराब होने के कारण छात्रों की संख्या भी घट रही है। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा में परिणाम भी गिर रहा है। कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि छात्रों से फीस अधिक नहीं मिलती है। कॉलेज में आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है। 25 प्रतिशत धनराशि कहां से लाई जाए। जनप्रतिनिधियों की भी मदद नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण कॉलेज की ओर से दूरी बनाई जा रही है। 25 प्रतिशत धनराशि को जमा करने में उन्हें परेशानी हो रही है।