लगातार बढ़ती पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। सीएनजी की कीमत 89.90 प्रति किलोग्राम पहुंचने के बाद अब लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं। खासकर छोटे रूटों पर लोग स्कूटी और कार छोड़कर ऑटो, साझा ऑटो और सरकारी बसों का सहारा ले रहे हैं। महंगे ईंधन के कारण रोजाना ऑफिस, बाजार और स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों का मासिक खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अब छोटी दूरी के लिए निजी वाहन निकालने से बच रहे हैं। नेशनल हाईवे-48 स्थित एचसीजी सीएनजी पंप पर भी वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिली। पंप के मैनेजर ने बताया कि यहां रोजाना करीब 7000 से 8000 किलोग्राम सीएनजी की खपत हो रही है। बढ़ती भीड़ के कारण बुधवार को हालात ऐसे हो गए कि सड़क पर जाम की स्थिति बनने लगी जिसके बाद यातायात नियंत्रित करने के लिए पुलिस की सहायता लेनी पड़ी। ईंधन के बढ़ते दामों का असर हर वर्ग पर पड़ रहा है। लोग अब बहुत सोच-समझकर वाहन इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग छोटी दूरी के लिए बाइक या कार की बजाय ऑटो और बसों का उपयोग कर रहे हैं। वहीं सुरक्षा नियमों के कारण अब ड्रमों और कंटेनरों में डीजल देना भी बंद कर दिया गया है। - अमित सक्सेना, गांधी नगर सीएनजी महंगी होने से परेशानी बढ़ गई है। सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन किराया उतना कैब का किराया नहीं बढ़ पा रहा है। अगर किराया बढ़ाते हैं तो सवारी कम हो जाती है। अब चालक और यात्री दोनों ही दबाव में हैं। - आशीष वर्मा, कैब चालक पहले अपने निजी मोटरसाइकल का इस्तेमाल करते थे लेकिन ईंधन की किमतों में इजाफा होने के बाद से ही सिटी बस का सहारा लेने लगे है। अब छोटी दूरी के लिए ऑटो और बस ज्यादा सस्ता विकल्प लग रहा है। - योगेश, यात्री अस्पताल, होटल, विद्यालय, सोसाइटी, कार्यालय और अन्य जगहों पर इस्तेमाल होने वाला डीजल नहीं दिया जा रहा है केवल वाहनों में ही डीजल डाला जा रहा है ताकि सड़क पर दौड़ रहे वाहन ना रूके। - सचिन, पेट्रोल पंप संचालक