कोंडागांव जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम मड़ानार के घने जंगलों के बीच स्थित स्वयंभू शिवलिंग आज श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस स्थल पर प्रतिदिन दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है, वहीं महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां अप्रत्याशित भीड़ उमड़ती है। जंगल के एक छोटे नाले के किनारे, जिसे स्थानीय लोग ‘उलट पानी’ का रास्ता कहते हैं, भगवान शिव विराजमान हैं।
स्थानीय समिति के सदस्यों के अनुसार इस स्थल की पहचान अगस्त 2023 में सावन माह के तीसरे सोमवार को हुई। गांव की एक आठ वर्षीय बालिका अपनी दादी के साथ जंगल में बोड़ा-फूटू (जंगली कंद-मूल) खोजने गई थी। तभी उसने नाले के पास तेज रोशनी और दिव्य दृश्य देखा। बच्ची के बुलाने पर जब उसकी दादी वहां पहुंचीं तो उन्होंने पानी की अनवरत धार से अभिषिक्त होता शिवलिंग देखा। इस अद्भुत दृश्य की जानकारी गांव में दी गई। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवस्थापना कर पुष्टि की कि यहां स्वयंभू शिव प्रकट हुए हैं। इसके बाद से यहां नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हो गई।
समिति के अध्यक्ष ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से आसपास कोई स्थायी नदी, तालाब या बड़ा जलस्रोत नहीं है, इसके बावजूद पूरे वर्ष शिवलिंग पर पानी की पतली धारा टपकती रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह चमत्कारिक घटना भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। प्रारंभ में शिवलिंग का आकार छोटा था, किंतु लोगों का दावा है कि समय के साथ इसकी चौड़ाई बढ़ती जा रही है। स्थल पर पहले से नंदी और गणेश जी की पाषाण प्रतिमाएं भी विद्यमान हैं, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आयोजन समिति द्वारा साफ-सफाई, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। घने जंगलों के बीच स्थित यह स्थान अब क्षेत्र की धार्मिक पहचान बनता जा रहा है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था एवं विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है।