मानसून की विदाई और धान की कटाई के साथ हर साल हरियाणा की हवा में प्रदूषण घुलने लगता है। प्रदेश के कई इलाके गंभीर रूप से वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाते हैं। दीपावली के बाद प्रदेश के अधिकतर इलाकों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अचानक बहुत खराब यानी रेड जोन में पहुंच जाता है। इसका बड़ा कारण दीपावली पर चलने वाली आतिशबाजी, त्योहार की आड़ में धड़ल्ले से पराली जलाना, त्योहार के चलते ट्रैफिक जाम और मौसम में आया बदलाव होता है। बीते कई वर्षों से देखा जा रहा है कि दीपावली से शुरू वायु प्रदूषण कई दिनों तक स्थिर रहता है। हालांकि हरियाणा सरकार ने मजबूती से दावा करते हुए कहा है कि वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों पर कदम उठाए जा रहे हैं। दिवाली से पहले हरियाणा के आठ शहरों की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है।यदि बीते सप्ताह के पहले के आंकड़ों को देखेंगे तो 17 अक्तूबर को गुरुग्राम में अब तक का सबसे ज्यादा एक्यूआई दर्ज किया गया है। एक हफ्ते पहले यानी दस अक्तूबर को एक्यूआई 162 दर्ज किया गया था। फतेहाबाद व अन्य शहरों में पिछले दिनों के मुकाबले अधिक एक्यूआई दर्ज किया गया है। यह ट्रेंड दिखाता है कि अगले कुछ दिनों में इन शहरों की वायु गुणवत्ता बहुत खराब (301-400) श्रेणी में पहुंच सकता है। इससे पर्यावरण प्रेमियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चिंताएं बढ़ गई हैं।