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कोंडागांव में नियमों को ताक पर रखकर चल रहा हॉट मिक्स प्लांट, कांग्रेस ने वन मंत्री पर साधा निशाना

Digvijay Singh Updated Wed, 19 Nov 2025 08:31 PM IST

कोंडागांव जिला मुख्यालय स्थित ग्राम पंचायत चिखलपुटी बस स्टैंड के पीछे PF-447 दहीकोंगा वन परिक्षेत्र की भूमि पर रितेश अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा स्थापित हॉट मिक्स प्लांट एक बार फिर विवादों में है। बिना पर्यावरण विभाग और फॉरेस्ट विभाग की अनुमति के लगाए गए इस प्लांट को लेकर वन विभाग ने मई 2025 में ठेकेदार को 10 दिन के भीतर हटाने का नोटिस जारी किया था। इसके बाद 22 मई से लेकर जून 2025 तक कुल तीन नोटिस जारी किए गए। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ठेकेदार रितेश अग्रवाल एंड कंपनी ने 25 जून 2025 को एक लिखित पत्र में स्वीकार किया था कि प्लांट वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त भूमि पर स्थापित है और उन्होंने 26 जून तक प्लांट को बंद कर अन्यत्र स्थानांतरित करने की बात कही थी। पत्र में यह भी उल्लेख था कि 24 जून से प्लांट का संचालन बंद कर दिया गया है। इसके बावजूद नवंबर 2025 में भी डामर प्लांट का संचालन बदस्तूर जारी है। इससे स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वन विभाग गरीब या आम नागरिक द्वारा नियम विरुद्ध कार्य होने पर तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन रसूखदार ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की जाती। कांग्रेस कोंडागांव के जिला महामंत्री रितेश पटेल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए वन मंत्री केदार कश्यप पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में कोंडागांव दौरे के दौरान जब मीडिया ने वन मंत्री से अवैध प्लांट पर कार्रवाई के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने कहा था कि ‘प्लांट आपसी सहमति से लगाया गया है।’ रितेश पटेल ने सवाल उठाया—क्या यह सहमति स्वयं वन मंत्री की है? उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विकास विरोधी नहीं है और बायपास सड़क निर्माण के लिए डामर प्लांट जरूरी है, लेकिन वन क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर किसी भी निर्माण कार्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उधर, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कर अवैध प्लांट को हटाने की मांग की थी, लेकिन आज तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसके उलट, बंद किए जाने की घोषणा के बाद भी प्लांट का संचालन दोबारा शुरू हो जाना वन विभाग की कार्यप्रणाली और नियमों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि क्या इस प्रकरण में वन विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा या मामला फिर रसूख के आगे दब जाएगा।

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