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मत्स्य नीति के विरोध में नाव रैली, छह अक्टूबर को एसडीएम कार्यालय घेराव की चेतावनी

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के बांगो बांध विस्थापित 52 गांवों के आदिवासी मछुआरों ने शनिवार को बुका जल विहार (हसदेव जलाशय) में नाव रैली निकालकर छत्तीसगढ़ सरकार की मत्स्य नीति 2022 का विरोध किया। मछुआरों ने बांध में मत्स्य पालन के लिए जारी निविदा को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की है। आदिवासी मछुआरों ने चेतावनी दी है कि यदि निविदा रद्द नहीं की गई तो 6 अक्टूबर 2025 को पोड़ी एसडीएम कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। आदिवासी मछुआरा संघ (हसदेव जलाशय) के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ किसान सभा का भी समर्थन मिला। किसान सभा ने मांग की कि बांगो डेम से प्रभावित विस्थापित परिवारों को मछली पालन का अधिकार दिया जाए। प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि 1980 के दशक में बांगो डेम बनने से 58 गांव डूब क्षेत्र में आ गए थे। विस्थापितों को आश्वासन दिया गया था कि वे मत्स्य पालन कर अपनी आजीविका चला सकेंगे, लेकिन बाद में बांध का नियंत्रण निजी ठेकेदारों को सौंप दिया गया, जिससे आदिवासी मछुआरे मजदूर बनकर रह गए। मछुआरा संघ के फिरतू बिंझवार ने बताया कि 2022 की नीति में भी बड़े जलाशयों को मत्स्य महासंघ के जरिए ठेके पर देने का प्रावधान जारी है। इसी आधार पर 2015 में दिए गए ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद फिर से 10 साल की नई लीज हेतु निविदा जारी कर दी गई है।

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