17 अक्तूबर को जगदलपुर का रक्षित केंद्र एक इतिहास रचने वाला है, जिसका कारण है कि 170 के लगभग नक्सली अपने 70 हथियारों के साथ मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री को सौंपते हुए भारत के संविधान के पदचिन्हों पर चलने की कसम खाते हुए भारत माता के जयकारे लगाएंगे। बता दें कि दो दिन पहले कांकेर जिले के अंतागढ़ बीएसएफ कैम्प में दो बसों में भरकर 50 नक्सलियों ने समर्पण किया था, जिसकी जानकारी अब तक पुलिस ने जारी नहीं किया, वहीं बीजापुर जिले के भैरमगढ़ में कई वर्षों से नक्सलियों के लिए अपनी जान तक गवाने वाले 120 नक्सली समर्पण करने के लिए इंद्रवती नदी को पारकर पुलिस अधिकारियों के पास आ गए हैं। 170 नक्सलियों अब जगदलपुर के पुलिस लाइन में एक साथ अपने हथियारों के साथ समर्पण करने के लिए पहुंच चुके हैं। इन समर्पण करने वालों में नक्सल प्रवक्ता और DKSZC नेता रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्ना अपने 120 साथियों के साथ जगदलपुर के पुलिस लाइन में आत्मसमर्पण करने के लिए पहुंच जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के हाथों नक्सली अपने हथियारों को सौंपते हुए पुलिस की विचारधारा के साथ अब कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। दरअसल, कुछ दिनों पहले ही रूपेश ने एक प्रेस नोट जारी कर शांति वार्ता के लिए केंद्र सरकार से नक्सल विरोधी अभियान को छह महीनों के लिए रोकने की बात कही थी। रूपेश समेत समर्पण करने वाले 120 नक्सलियों को लाने के लिए बीजापुर पुलिस ने सम्पूर्ण तैयारियां करने के साथ ही सभी को जगदलपुर लाया जाएगा, जिसके बाद सभी नक्सली मुख्यमंत्री के सामने अपने हथियार सुपुर्द कर देंगे, जगदलपुर में होने वाले सबसे बड़े आत्मसमर्पण को लेकर तैयारी तेज कर दिया गया है।