छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी जारी है। राज्य सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, वहीं किसानों को बोनस जोड़कर 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। इस अतिरिक्त 731 रुपये के अंतर का फायदा उठाकर मध्यप्रदेश से अवैध रूप से धान की तस्करी छत्तीसगढ़ में की जा रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिला मध्यप्रदेश की सीमा से लंबा बॉर्डर साझा करता है। सीमा क्षेत्र में कई मुख्य सड़कें और पगडंडियां मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल कर धान तस्कर कभी दिन के उजाले में तो कभी रात के अंधेरे में मध्यप्रदेश से धान लाकर छत्तीसगढ़ में खपा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा तस्करी रोकने के जगह जगह बेरियर तो कई उड़नदस्ता टीम भी बनाते हुए अवैध धान की आवक रोकने का प्रयास भी किए गए हैं। तो जहां-जहां से जिन रास्ते से तस्करी की सूचना मिलती है, वहां कच्चे रास्तों को बंद किया जा रहा है या गड्ढे खोदकर वाहनों की आवाजाही रोकी जा रही है। बावजूद इसके तस्कर अब मोटर साइकिल के जरिए छोटे-छोटे खेप में धान को मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ पहुंचाने में लग गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि धान की बड़ी खेप मुख्य सड़कों और पगडंडियों दोनों से छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रही है। अधिकारियों द्वारा तस्करी रोकने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसी वजह से ग्रामीणों में नाराजगी है और प्रशासनिक अधिकारियों पर निष्क्रियता के आरोप लगाए जा रहे हैं।अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन अवैध धान तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण कर पाता है या फिर कार्रवाई के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं।