धमतरी के मगरलोड के ग्राम मोहेरा घने जंगलो के बीच मौजूद मां निरई माता के दरबार है। जो कि साल में एक दिन यानी चैत्र नवरात्रि के दौरान पहले रविवार को माता का दरबार खुलता है। जहां बड़ी संख्या में सुबह से ही श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। वहीं इस दरबार में महिलाओं का आना सख्त मना है। बताया जाता है कि सैकड़ों साल पहले बीहड़ पहाड़ में मां निरई माता का मंदिर स्थापना की गई और वही पुजारी बैगा की सेवा से प्रसन्न होकर माता अपने भक्त बैगा को ममता का दुलार देती थी। बैगा की पत्नी के शक पर माता क्रोधित हो उठी।जिसके बाद किसी भी महिला को नही देखने अपनी इच्छा जाहिर की।यही वजह है कि इस मंदिर में महिलाओं का आनेजाने में मनाही है।चैत्र नवरात्र के पहले रविवार को ही माता के दर्शन करने का रिवाज है।वही माँ निरई माता का यह दरबार श्रद्धालुओ के आस्था का केन्द्र बन गया है।श्रद्धालु मनोकामनाए पूर्ण होने पर फल फूल चढ़ाते है।जिससे माता निरई प्रसन्न होती है। बताया जाता है कि यहां खुद अपने आप ज्योति कलश प्रज्ज्वलित हो जाती हैं। माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में दूर दराज क्षेत्र से भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना को पूरा करने को लेकर पहुंचते हैं।