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Dhamtari News: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी बाघिन, बाघों की वापसी के मिले संकेत; देखें वीडियो

Tue, 23 Jun 2026 09:04 PM IST
धमतरी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

धमतरी/गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। हाल के दिनों में रिजर्व क्षेत्र में लगाए गए कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम ने वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के बीच नई उम्मीद जगा दी है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघों की स्थायी वापसी की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व लंबे समय से बाघों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना करता रहा है। ऐसे में किसी बाघिन की सक्रिय मौजूदगी केवल एक वन्यजीव के दिखाई देने की घटना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ जैसे शीर्ष शिकारी की उपस्थिति किसी भी जंगल के स्वस्थ और संतुलित होने का प्रमाण होती है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि अभयारण्य क्षेत्र में दिखाई देने वाली बाघिन की उम्र लगभग चार वर्ष आंकी गई है। यह बाघिन पिछले 11 दिनों में तीन अलग-अलग अवसरों पर कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के उपलब्ध आंकड़ों में इस बाघिन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। यही कारण है कि इसे इस क्षेत्र की नई सदस्य माना जा रहा है।

उप निदेशक ने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह बाघिन महाराष्ट्र के चंद्रपुर सीमावर्ती क्षेत्र से होते हुए उदंती-सीतानदी पहुंची हो सकती है। वहीं, कुछ विशेषज्ञ इसके अबूझमाड़ क्षेत्र से आने की संभावना भी जता रहे हैं।

बाघिन की लगातार मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि उसने इस क्षेत्र को अपने संभावित आवास के रूप में चुनना शुरू कर दिया है। वरुण जैन ने बताया कि वर्ष 2018 के बाद यह पहला अवसर है, जब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में किसी बाघिन की स्पष्ट मौजूदगी दर्ज की गई है। पिछले आठ वर्षों में यह दूसरी बार है, जब क्षेत्र में बाघिन दिखाई दी है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में यहां बाघों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग द्वारा संरक्षण और प्रबंधन को लेकर बड़े स्तर पर कार्य किए गए हैं। खासतौर पर पिछले दो वर्षों में अभयारण्य क्षेत्र की 900 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि से अवैध कब्जे हटाए गए हैं। इसके अलावा शिकारियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर कई मामलों में गिरफ्तारी की गई है। इन प्रयासों के कारण जंगल में वन्यजीवों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।

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