पर्यावरण संरक्षण के दावों के बावजूद पेड़ कटाई की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बलौदा बाजार जिले के पलारी थाना परिसर में हाल ही में रातों-रात कई हरे-भरे पेड़ काट दिए गए। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। बताया जा रहा है कि नगर पंचायत के सीएमओ और ठेकेदार की मिलीभगत से यह पेड़ बिना थाना प्रभारी की अनुमति काटे गए। पुलिस विभाग और वन विभाग को इस घटना की जानकारी नहीं थी। थाना परिसर के कर्मचारियों ने सुबह कटे हुए पेड़ों को देखा और इसकी सूचना थाना प्रभारी को दी। पेड़ काटने के बाद लकड़ियों को ठेकेदार द्वारा बेचा जा रहा था। जिसे कर्मचारियों के द्वारा ले जाने से मना किया गया। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। नियमों के अनुसार, राजस्व क्षेत्र में पेड़ काटने के लिए तहसील से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन इस मामले में किसी ने अनुमति नहीं ली। यह घटना प्रशासन की पर्यावरण संरक्षण नीतियों पर सवाल खड़े करती है। पेड़ कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी बुरा प्रभाव डालती है।