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'हम बेरोजगार हो जाएंगे', नोटिस के बाद बालोद के निजी चिकित्सकों की बढ़ी चिंता

Lalit Kumar Singh Updated Wed, 15 Oct 2025 02:51 PM IST

बालोद जिले के कांदुल गांव में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से हुई एक मरीज की मौत के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। मामले के बाद बालोद जिले में संचालित सैकड़ों निजी चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में चिकित्सकों से यह स्पष्ट करने कहा गया है कि वे किस आधार पर चिकित्सा कार्य कर रहे हैं, साथ ही उनसे मान्यता प्राप्त मेडिकल काउंसिल की अनुमति और संबंधित डिग्रियों के दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस जारी होने के बाद बुधवार को बालोद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) कार्यालय में निजी चिकित्सकों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई चिकित्सक अपनी रोजी-रोटी पर संकट की आशंका जताते हुए जवाब देने पहुंचे।निजी प्रैक्टिसनर विशंभर सिन्हा ने बताया कि प्रशासन ने सभी निजी चिकित्सकों को नोटिस जारी कर डिग्री और अनुमति पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं, ऐसे में यह कार्रवाई उनके रोजगार पर असर डाल सकती है। हालांकि, प्रशासन ने कुछ दिनों का समय दिया है ताकि सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकें। इसी तरह डॉ. एस. मिलाप ने कहा कि शासन को गांवों के निजी चिकित्सकों के लिए भी वैद्यराज की तरह गाइडलाइन तय करनी चाहिए, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं अधिकतर इन्हीं चिकित्सकों पर निर्भर हैं। वहीं योगेश दिल्लीवार, निजी चिकित्सक ने कहा कि जिस तरह एक्ट लगाकर नोटिस जारी किए गए हैं, उससे निजी प्रैक्टिस बंद करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “हमने अपना जीवन चिकित्सा सेवा में लगा दिया है, हमें और कोई काम नहीं आता। अगर प्रैक्टिस बंद हुई तो हम बेरोजगार हो जाएंगे।”

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