पुस्तक एशिया का चानन (अर्नाल्ड का लिखा लाइट ऑफ एशिया) ने मेरे जीवन पर गहरा असर डाला। मेरा नजरिया बदल दिया। यह पहली ऐसी किताब थी। यह महात्मा बुद्ध के दर्शन और जीवन पर आधारित थी। मुझे चीजों को देखने और समझने में मदद की। मेरा नजरिया बदल दिया। मेरा उपन्यास निर्वाण भी उसी पर आधारित है। जो बोध गया के इर्द गिर्द घूमता है। उस किताब को बचपन में पढ़ी थी। उस किताब ने सोचने और समझने का अवसर दिया। इसी किताब को पढ़ने के 40 वर्ष के बाद निर्वाण उपन्यास लिखा था। बचपन में पड़ा बीज 40 वर्ष के बाद निर्वाण के रूप में आया। अगर यह किताब नहीं पढ़ा होता हो बुद्ध को नहीं जानता।
किताबों ने पुराना नाता है। घर में बड़ा लाइब्रेरी भी है। किताबें अनुभवों का संग्रह है। मानवीय सभ्यता, ज्ञान ये सभी चीजें किताबों से ही मिलती है। एक किताब में हजारों अनुभव होते हैं। किताबें नहीं पढ़ता तो अनुभवों से वंचित रहता। किताबों की असीम दुनिया है। इसका कोई अंत नहीं है। ज्ञान का कोई अंत नहीं है। पढ़ना एक आनंद है। पढ़ना श्रम भी है। यदि श्रम और आनंद मिल जाए तो परमानंद बनता है। किताब ज्ञान के साथ परमानंद भी देता है। अब तक 50 से भी अधिक किताबें लिख चुके हैं। किताब का जीवन में हमेशा महत्व है और रहेगा। एक किताब के माध्यम से कई अनुभव आता है।