केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर है... महंगाई भत्ते यानी डीए और महंगाई राहत यानी डीआर में एक बार फिर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है... करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे... माना जा रहा है कि डीए और डीआर में तीन फीसदी का इजाफा हो सकता है... अगर केंद्रीय कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो बढ़ा हुआ डीए पहली जुलाई 2026 से लागू माना जाएगा... यानी कर्मचारियों और पेंशनरों को एरियर के साथ आर्थिक फायदा मिल सकता है... लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी है... क्या 50 फीसदी से ऊपर पहुंच चुका डीए बेसिक सैलरी में मर्ज होगा?... सरकार इस पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुकी है...
केंद्र सरकार के करीब 49 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी की उम्मीद है। मौजूदा समय में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को 60 फीसदी की दर से डीए/डीआर मिल रहा है।
अगर सरकार तीन फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी देती है, तो डीए और डीआर की दर बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगी। प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसका लाभ पहली जुलाई 2026 से मिलने की उम्मीद है।
यानी कर्मचारियों को बढ़ी हुई दर का फायदा जुलाई से मिलेगा और मंजूरी में देरी होने की स्थिति में एरियर का भुगतान भी किया जा सकता है।
कैसे बढ़ता रहा DA?
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का सिलसिला पिछले कुछ समय से जारी है। पिछले साल एक जुलाई से कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए/डीआर में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दर 58 फीसदी पहुंची थी।
फिर एक जनवरी 2026 से इसमें दो फीसदी का इजाफा किया गया और डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।
अब जुलाई 2026 के लिए तीन फीसदी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। अगर ये बढ़ोतरी होती है तो डीए/डीआर 63 फीसदी हो जाएगा।
डीए की गणना के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI-IW के आंकड़ों को अहम माना जाता है।
जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच CPI-IW 146.5 से बढ़कर 148.2 तक पहुंचा। वहीं जनवरी 2026 में ये 148.6 रहा और जुलाई 2026 में बढ़कर 153.2 हो गया।
यानी इस अवधि में सूचकांक में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। जून 2026 में महंगाई दर 4.76 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में ये 2.55 फीसदी थी।
श्रम ब्यूरो देश के 88 महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों और 317 बाजारों से जुटाए गए खुदरा मूल्यों के आधार पर औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करता है।
लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सिर्फ डीए बढ़ना ही मुद्दा नहीं है। लंबे समय से सबसे बड़ा सवाल ये है कि 50 फीसदी से ज्यादा हो चुके महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज किया जाएगा या नहीं।
एक जनवरी 2024 को डीए 50 फीसदी पहुंच गया था, लेकिन इसे बेसिक वेतन में मर्ज नहीं किया गया। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार डीए को बेसिक पे में मर्ज करने की योजना नहीं रखती।
यानी अगर डीए 63 फीसदी तक पहुंचता है, तब भी कर्मचारियों को इसे अलग भत्ते के तौर पर ही मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन डीए की गणना के मौजूदा तरीके में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं।
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर डीए की गणना के लिए 12 महीने के औसत की जगह तीन महीने के औसत का इस्तेमाल करने की मांग की है।
संगठन का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को महंगाई में होने वाली वास्तविक बढ़ोतरी की भरपाई जल्दी मिल सकेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के डीए की गणना भी तिमाही आधार पर की जाती है।
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि डीए की गणना और भुगतान छह महीने के बजाय हर तीन महीने में किया जाए। इसके साथ ही पॉइंट-टू-पॉइंट डीए देने की मांग भी उठाई गई है।
मौजूदा व्यवस्था में दशमलव वाली दर को नीचे की ओर राउंड ऑफ करने से कर्मचारियों को कुछ हिस्से का फायदा नहीं मिल पाता। संगठनों का कहना है कि बैंक और एलआईसी कर्मचारियों की तरह केंद्रीय कर्मचारियों को भी पॉइंट-टू-पॉइंट डीए मिलना चाहिए।
फिलहाल करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर डीए/डीआर में संभावित तीन फीसदी बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं।
अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो डीए 60 से बढ़कर 63 फीसदी हो सकता है और बढ़ी हुई दर का लाभ पहली जुलाई 2026 से मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, डीए में बढ़ोतरी के साथ बेसिक पे में मर्जर, गणना की अवधि और पॉइंट-टू-पॉइंट भुगतान जैसे मुद्दे भी कर्मचारियों की मांगों में बने हुए हैं। ऐसे में आने वाला फैसला सिर्फ डीए की नई दर ही नहीं, बल्कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच आगे की बातचीत की दिशा भी तय कर सकता है।