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Giriraj Singh on Rahul Gandhi: राहुल गांधी अर्बन नक्सल की तरह व्यवहार करते हैं, बोले गिरिराज सिंह | Bihar News

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। कहा कि जब किसी पार्टी का नेता, जैसे राहुल गांधी, शहरी नक्सली जैसी भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह स्वाभाविक है कि उस पार्टी के अन्य नेता भी वैसी ही बातें करेंगे। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चिदंबरम साहब ने जो कहा, वो बहुत देर से कहा। उन्होंने माना कि मनमोहन सिंह की सरकार एक कमजोर सरकार थी, उसमें इच्छाशक्ति की कमी थी। और यह इच्छाशक्ति की कमी इसलिए थी क्योंकि कांग्रेस पाकिस्तान को एक वोट बैंक के तौर पर देखती है। गिरिराज सिंह ने आगे सवाल उठाया कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि देश बड़ा है, पार्टी बड़ी है या वोट बड़ा है? यूपीए सरकार अल्पमत में नहीं थी, फिर भी उसमें इच्छाशक्ति की कमी थी। इसलिए शाहबानो केस में कांग्रेस ने घुटना टेक दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना करते हुए कहा कि अगर उस समय मोदी प्रधानमंत्री होते, तो पाकिस्तान पर जो कार्रवाई आज 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए की गई है, शायद वही कार्रवाई उस समय ही कर दी जाती। तब शायद आज 'ऑपरेशन सिंदूर' की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने सिर्फ 16 साल के बाद ये स्वीकारा है कि मुंबई के नृशंस 26\11 हमले के बाद वे पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में थे लेकिन उस समय के विदेश विभाग ने उन्हें रोक दिया और मनमोहन सिंह खामोश रहे। कितनी कमजोर सरकार थी, भारतीय मारे गए और कोई आंतरिक मजबूती नहीं।  सोनिया गांधी कहां थीं? चलती तो उन्ही की थी जैसे अभी राहुल गांधी की चलती है...क्या राहुल गांधी कुछ बोलेंगे?... इतनी बड़ी त्रासदी हुई, जिसे पी.चिदंबरम ने स्वीकारा है, राहुल गांधी कुछ तो बोलिए।

जानिए, क्या कहा था चिदंबरम ने
दरअसल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने  26/11 मुंबई आतंकी हमले को लेकर कहा था कि 2008 के हमले के बाद तात्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव, खासकर तब की अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस की अपील के चलते भारत ने युद्ध का विचार त्याग दिया था। चिदंबरम ने कहा, मेरे मन में बदला लेने का विचार आया था और मैंने प्रधानमंत्री से भी इस पर चर्चा की थी। लेकिन विदेश मंत्रालय और भारतीय विदेश सेवा की सलाह के आधार पर सरकार ने जवाब नहीं देने का निर्णय लिया।

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