बिहार के मुजफ्फरपुर शहर से लगभग 32 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में उजाड़ पड़ी मोतीपुर चीनी मिल इलाके के सुनहरे औद्योगिक अतीत की कहानी बयां करती है। 1930 के दशक की शुरुआत में एक निजी उद्यम के रूप में स्थापित, चीनी मिल को बाद में बिहार राज्य चीनी निगम ने अधिग्रहित कर लिया था। इस मिल को 1990 के दशक के आखिर में अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया। अब 115 एकड़ में फैले इस फैक्ट्री परिसर में छाए सन्नाटे और यहां के माहौल को देखकर यह कल्पना करना मुश्किल हो जाता है कि कभी यह चीनी मिल परिसर मज़दूरों और आयातित मशीनों से कितना गुलजार रहा होगा। यह उपेक्षित इलाका अब जंगली झाड़ियों से भर गया है। यह परिसर बदमाशों का अड्डा बन गया है। यहां चोरी और सुरक्षा गार्डों पर आपराधिक हमले आम बात हो गई है।
मोतीपुर के युवा भी चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने के साथ-साथ इलाके में शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार और बेहतर रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर निवासी आकाश सिंह बोले- "हमारे माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री जी यहां पर आ रहे हैं, तो उनसे तो यही मांग है कि ये चीनी मिल हैं उसको चालू करवा दें ताकि यहां के युवाओं को रोजगार मिले और बुजुर्गों को भी रोजगार मिले और एक और मांग है कि हमारे यहां एक जीवक्ष कॉलेज है। मात्र एक ही कॉलेज हैे मोतीपुर प्रखंड में, उसको चाहते हैं कि कॉलेज को बढ़ावा दें। हमें यहां से लगभग 35 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है मुजफ्फरपुर, पढ़ाई करने के लिए, यहां पर कॉलेज की भी मांग करते हैं।" मुजफ्फरपुर निवासी सुशांत सिंह बोले- हम लोग तो यही चाहते हैं कि यहां की जो फैक्ट्री और भी हैं वो चालू हों। जो मोतीपुर का चीनी मिल है वो चालू हो और शिक्षा पर और भी मजबूत व्यवस्था हो यही हम लोग चाहते हैं।"
वर्षों से मोतीपुर की बंद पड़ी चीनी मिल चुनावी मुद्दा रही है। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर कई नेताओं ने मिल को दोबारा शुरू कराने का वादा भी किया लेकिन सभी वादे खोखले साबित हुए। बंद पड़ा फैक्ट्री परिसर इलाके की कड़वी सच्चाई है, जिसे मतदाता इस बार के विधानसभा चुनावों में नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। मुजफ्फरपुर में बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में छह नवंबर को वोट डाले जाएंगे। चुनाव नतीजों का ऐलान 14 नवंबर को होगा।