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Bihar Assembly Elections 2025: सीवान जिले का खूनी राजनीतिक इतिहास सबसे अहम चुनावी मुद्दा | Siwan | Saran

Video Updated Thu, 30 Oct 2025 01:34 PM IST

बिहार का सीवान ज़िला लंबे समय से सूबे का एक प्रभावशाली क्षेत्र रहा है। बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन इसी जिले से चार बार सांसद रहे थे। चुनावी माहौल में कुछ लोग 1997 में प्रमुख छात्र कार्यकर्ता और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद के हत्याकांड को भी याद कर रहे हैं। उस घटना ने पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। सीवान जिले के कई लोग दावा करते हैं कि बिंदुसार गांव के रहने वाले चंद्रशेखर की हत्या की साजिश खुद शहाबुद्दीन ने ही रची थी। उस वक्त चंद्रशेखर सीपीआई (एमएल) से जुड़े थे। उस हत्याकांड के अट्ठाईस साल बाद चंद्रशेखर के भतीजे सौरभ सिंह अब बीजेपी के साथ हैं। सौरभ का कहना है कि आरजेडी के साथ जुड़ने से सीपीआई (एमएल) की विश्वसनीयता अब पहले जितनी नहीं रह गई है।

चंद्रशेखर प्रसाद के भतीजे सौरभ सिंह ने कहा- "यही लोग को अब समझना पड़ेगा, जिस लड़ाई के लिए चंद्रशेखर पूरे बिहार में लड़ते थे, जिस आरजेडी के खिलाफ, वही आज 'माले' के लोग आरजेडी की गोद में जाकर के बैठ गए हैं। अपने सत्ता सुख के लिए। दूसरा उन लोगों का क्या है। वो लोग लाश पर राजनीति करते हैं। मान लीजिए किसी का हत्या हुआ, उन्हीं लोगों के चलते वही लोग आज आरजेडी की गोद में जाकर के बैठ गए हैं।" सौरभ सिंह के दावे अपनी जगह हैं लेकिन सीपीआई (एमएल) नेताओं ने चंद्रशेखर और बीजेपी के बीच वैचारिक मतभेदों को याद दिलाते हुए अपने फ़ैसले का बचाव किया है। सीपीआई (एमएल) के नेता अपने गठबंधन को एक रणनीतिक क़दम बताते हैं और एनडीए पर चुनावी फ़ायदे के लिए इसे मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहे हैं।

वीओ: रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे जेडीयू उम्मीदवार विकास सिंह ने सीपीआई (एमएल) और आरजेडी के बीच गठबंधन को एक हताशा भरा कदम बताया है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि एनडीए चुनावों में भारी जीत हासिल करेगा। रतनपुर निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू प्रत्याशी विकास सिंह ने कहा- 
"देखिए, जब बाढ़ आती है ना, तो सांप-बिच्छू एक ही पेड़ पर चढ़ जाते हैं, तो यहां एनडीए की आंधी चल रही है। यहां के लोग मन मिजाज बना लिए हैं इसलिए किसी तरह का किंतु परंतु नहीं है कोई यहां पर माफियाराज नहीं आने वाला है, यहां पर विकास ही जीतेगा।" 6 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले प्रचार अभियान तेज होने के साथ ही सीवान का हिंसक राजनीतिक इतिहास एक बार फिर चर्चाओं में है। इतना ही नहीं एनडीए ने इसे एक अहम चुनावी मुद्दा भी बना दिया है।

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