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आजादी के बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे तालबांदनी के ग्रामीण

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जानजोखिम में डालकर इस तरह उफनते गदेरे को पार कर रहे तालबांदनी के ग्रामीण। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। भले ही देश को आजाद हुए 75 वर्ष बीत गए हो, लेकिन तालबांदनी के ग्रामीण आज भी अपने को गुलामी की जंजीरों में कैद मान रहे हैं। इस गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। गांव में यातायात सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीण बरसात में जानजोखिम में डालकर उफनते गाड़ गदेरे को पार करने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी आज तक समस्या जस की तस बनी हुई है।
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यमकेश्वर ब्लॉक अंतर्गत ऋषिकेश से मात्र 30 किमी दूर तालबांदनी गांव पड़ता है। इस गांव के आसपास कंटरा, आमकाटल आदि करीब एक दर्जन से अधिक गांव हैं। मानसून सीजन जुलाई और अगस्त में इन गांवों के ग्रामीणों की दुश्वारियां अधिक बढ़ जाती है। गदेरे ऊफान पर आने से इन गांवों में यातायात की सुविधा बंद हो जाती है। जैसे-जैसे गदेरे का पानी कम होता है तभी ये लोग आवाजाही करते हैं। गदेरों के ऊपर कहीं भी पैदल पुल की सुविधा नहीं है। ऐसे में स्कूली बच्चे और ग्रामीणों को आवाजाही करने में बहुत परेशानी हो रही है।
स्थानीय ग्रामीण अरविंद सिंह, मनोरमा देवी, विशनी देवी, नरेंद्र रावत, धनवीर रावत, बालम सिंह ने बताया कि आजादी के बाद से एक दर्जन से अधिक ग्रामीण मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। गांव के ग्रामीण आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, नेटवर्क से महरुम हैं। जनप्रतिनिधियों को चुनाव में ही इस क्षेत्र की सुध आती है। चुनाव जीतने के बाद कोई भी प्रत्याशी इन गांवों में झांकते तक नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि इस बार सबने एकजुट होकर विधानसभा चुनाव का विरोध करने की ठानी है।
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