स्वर्गाश्रम क्षेत्र में घूम रहे निराश्रित जानवर।
- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। तीर्थनगरी को योगनगरी के रुप में एक पहचान मिली है। योगनगरी घूमने के लिए देश, विदेशी के पर्यटक यहां पहुंचते हैं। लेकिन त्रिवेणीघाट, लक्ष्मणझूला, रामझूला, तपोवन, मुनिकीरेती आदि क्षेत्रों में घूम रहे निराश्रित पशु इस पहचान को बदरंग कर रहे हैं। साथ ही देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। क्षेत्र में धमार्थ के नाम पर कई गोशालाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन ये लोग भी अपने पशुओं को खुला छोड़ देते। नतीजन गंगा घाटों और तटों पर घूम रहे ये पशु जगह-जगह गंदगी फैला रहे हैं और यातायात भी बाधित कर रहे हैं।
लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, तपोवन, मुनिकीरेती, त्रिवेणीघाट, कैलासगेट, चंद्रभागा, मुख्यबाजार आदि जगहों पर घूम रहे निराश्रित पशुओं से क्षेत्रवासियों को निजात नहीं मिल रही है। मुख्य बाजारों में घूम रहे निराश्रित पशु दुर्घटना का कारण भी बने हुए हैं। लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और ऋषिकेश में कई संस्थाएं हैं जो धमार्थ के नाम पर गोशाला संचालित कर रहे हैं। धर्म के नाम पर उन संस्थाओं में लाखों रुपये का फंड भी आता है। उसके बावजूद भी निराश्रित पशु शहर के मुख्यबाजार, गलियो, गंगा घाटों और तटों पर विचरण कर रहे हैं। कभी-कभी तो ये पशु आपसी झगड़े में पर्यटकों को ही भी घायल कर देते हैं। वर्ष 2016 की बात करें तो स्वर्गाश्रम स्थित भारतसाधु समाज बाजार में दो सांड आपस में लड़ गए थे। आपसी संघर्ष में इन्होंने दो दुकानों का शटर तोड़ दिया था। जिससे स्थानीय व्यापारी को हजारों रुपये का नुकसान हुआ था।
नगरपालिका मुनिकीरेती क्षेत्र में गौशाला निर्माण के लिए शासन से पत्राचार किया जा चुका है, जल्द ही पालिका क्षेत्र में निराश्रित जानवरों के लिए कांजी हाउस का निर्माण होगा।
बद्रीप्रसाद भट्ट, ईओ, नगरपालिका मुनिकीरेती ढालवाला।
कांजी हाउस बनाने के लिए निकाय के पास भूमि उपलब्ध नहीं है। इसके लिए प्रशासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।
माधव अग्रवाल, अध्यक्ष, नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक।