फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड सियासी संकट: एक नजर में जानें कब क्या-क्या हुआ

Fri, 22 Apr 2016 01:15 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 27 मार्च को लगा था उत्तराखंड में ‌राष्ट्रपति शासन
  • कांग्रेस के नौ विधायकों ने खोला था भाजपा के खिलाफ मोर्चा
  • उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हरी्श रावत ने की थी याचिका दायर
विज्ञापन
हरीश रावत - फोटो : file photo
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें उसने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद हरीश रावत का मुख्यमंत्री पद बहाल हो गया है।
विज्ञापन


ऐसे में कब क्या-क्या हुआ। शक्तिमान के घायल होने से राष्ट्रपति शासन हटने तक का पूरा सियासी घटनाक्रम जानिए एक नजर में-
 
14 मार्च- भाजपा की रैली में विधायक गणेश जोशी पर पुलिस के घोड़े शक्तिमान को घायल करने का आरोप। विधायक समेत कई के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज।

15 मार्च- विधानसभा सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष ने शक्तिमान को लेकर किया हंगामा। सदन से बाहर भी हुए विधायक के खिलाफ प्रदर्शन।

16 मार्च- शक्तिमान के घायल होने के वीडियो को आधार बनाकर विधायक की गिरफ्तारी की रणनीति हुई तैयार।

17 मार्च- दिनभर पुलिस ने भाजपा नेताओं के लिए हल्द्वानी और दून में दबिश दी। एक गिरफ्तारी भी हुई। देर शाम सरकार को अल्पमत में लाने की भाजपा ने असंतुष्ट विधायकों के साथ मिलकर तैयार की रणनीति। सरकार गिराने के लिए सदन में हंगामे का अमर उजाला ने किया खुलासा।

18 मार्च- सुबह विधायक गणेश जोशी शक्तिमान घोड़े को घायल करने में एक होटल से गिरफ्तार हुए तो शाम को विधानसभा में नौ कांग्रेस के विधायकों ने विनियोग विधेयक पारित करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर वोटिंग की मांग की। इसी दिन से सरकार पर संकट गहराया गया। बागी विधायक भाजपा के साथ मिलकर राज्यपाल से मिलकर विश्वास मत की मांग करने के बाद दिल्ली रवाना हुए।
विज्ञापन


19 मार्च- राज्यपाल ने सीएम हरीश रावत को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के लिए भेजा पत्र। सरकार ने बागी विधायकों के घर पर दल बदल कानून के तहत सदस्यता निरस्त करने का नोटिस चस्पा किया।

20 मार्च- विधानसभा अध्यक्ष ने 28 मार्च को सदन आहूत करने का पत्र सदस्यों को भेजा। राज्यपाल से मिली डेडलाइन से सरकार दिखी राहत में।

21 मार्च- भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग राष्ट्रपति दरबार में पहुंची। भाजपा ने 18 मार्च को हुए हंगामे को आधार बनाकर सरकार बर्खास्त करने की रखी मांग।

22 मार्च- अमर उजाला ने खुलासा किया कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। विधायक गणेश जोशी की जमानत याचिका हुई मंजूर।

23 मार्च- राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को 28 मार्च को सदन में मर्यादा बनाए रखने के भेजे संदेश से कई सवाल खड़े कर दिए। इस संदेश से राष्ट्रपति शासन लगने के आधार को और बल मिला।

24 मार्च- बागी विधायकों ने दिल्ली में दावा जताया कि सरकार से कोई समझौता नहीं होगा। विधानसभा अध्यक्ष को कुछ बागियों ने नोटिस के भेजे जवाब।

25 मार्च- बागी विधायकों ने दल बदल कानून को आधार बनाकर सदस्यता समाप्त करने के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पीकर के खिलाफ याचिका खारिज कर दी।

26 मार्च- सीएम हरीश रावत का स्टिंग आया सामने, जिसमें बागी विधायकों को मनाने के लिए खरीद फरोख्त की जिक्र कर रहे थे। स्टिंग आपरेशन से राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना प्रबल हो गई। वहीं कांग्रेस का पूरा खेल बिगड़ गया। केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति को भेजी धारा 356 लागू करने की सिफारिश।
Trending Videos
विज्ञापन

27 मार्च को प्रदेश में लगा दिया गया राष्ट्रपति शासन

हरीश रावत - फोटो : file photo
27 मार्च- भाजपा, कांग्रेस और बागी विधायक देहरादून पहुंचना शुरू हुए इसी बीच केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने दोपहर बाद राष्ट्रपति शासन लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी।

28 मार्च- पूर्व सीएम हरीश रावत केंद्र के राष्ट्रपति शासन लागू करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की सिंगल बैंच गए।

29 मार्च- कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने सदस्यता समाप्त करने के विरोध में हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका।

30 मार्च- हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने हरीश रावत को सदन में बहुमत साबित करने का दिया निर्णय।

31 मार्च- एकल बैंच के निर्णय के खिलाफ डबल बैंच में याचिका हुई दाखिल।

2 अप्रैल- पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक और याचिका दाखिल कर बजट अध्यादेश को दी चुनौती।

7 अप्रैल- हाईकोर्ट की डबल बैंच ने फ्लोर के एकल पीठ के निर्णय को 18 अप्रैल तक स्थगित कर दिया।

12 अप्रैल- एकल पीठ ने बागी विधायकों की याचिका पर 23 अप्रैल तक टाली सुनवाई।

18 अप्रैल- राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में शुरू हुई सुनवाई

21 अप्रैल- हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन समाप्त कर 29 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट का दिया आदेश।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें