पिथौरागढ़। जिले में बोर्ड परीक्षाओं में अटल आदर्श और राजकीय मॉडल विद्यालयों के छात्रों का बोर्ड परीक्षाओं में फीका प्रदर्शन रहा। जिले के एकमात्र केएनयू जीआईसी के छात्र को मेरिट की सूची में स्थान मिला है। विण, मूनाकोट, गंगोलीहाट, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, कनालीछीना के 16 विद्यालयों को राजकीय मॉडल विद्यालय का दर्जा दिया गया जबकि सभी विकासखंडों में 16 अटल आदर्श विद्यालय भी हैं।
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में विण ब्लॉक के केएनयूआईसी के एक मात्र छात्र प्रियांशु भट्ट ने प्रदेश की सूची में स्थान पाया। जीजीजीआईसी की छात्राएं भी मेरिट में स्थान नहीं बना सकीं। मूनाकोट ब्लॉक के जीआईसी आठगांवशिलिंग, जीजीआईसी मूनाकोट, कनालीछीना ब्लॉक में जीआईसी कनालीछीना, जीआईसी मुवानी, डीडीहाट ब्लॉक में जीआईसी डीडीहाट, जीआईसी जौरासी, धारचूला ब्लॉक में जीआईसी बरम, धारचूला, मुनस्यारी ब्लॉक में जीआईसी मदकोट, डोर, बेड़ीनाग ब्लॉक में जीआईसी पांखू, जीजीआईसी बेड़ीनाग, गंगोलीहाट ब्लॉक में जीआईसी बनकोट, तामानौला के शिक्षकों की मेहनत जिले के छात्र-छात्राओं को मेरिट में स्थान नहीं दिला सकी। हालांकि शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों की परिणामों से विभागीय अधिकारी संतुष्ट हैं।
अटल उत्कृष्ट विद्यालय में भी छात्रों को स्थान नहीं
पिथौरागढ़। बोर्ड की परीक्षाओं में अटल उत्कृष्ट विद्यालय भी पीछे रहे। जीआईसी थरकोट, गोरंगचौड़, जीआईसी झूलाघाट, बड़ाबे, जीआईसी देवलथल, नारायणनगर, जीआईसी डीडीहाट, जौरासी, जीआईसी बरम, बलुवाकोट, जीआईसी मुनस्यारी, नाचनी, जीआईसी जाबुकाथल, बेड़ीनाग, जीआईसी गंगोलीहाट, गणाईगंगोली में भी छात्र प्रदेश की सूची में स्थान नहीं बना सके।
पहाड़ी मैदानों के मुकाबले पहाड़ों के राजकीय मॉडल और अटल उत्कृष्ट विद्यालयों का बेहतर प्रदर्शन रहा है। पिथौरागढ़ को छोड़कर अन्य ब्लॉकों में शिक्षकों की कमी है। विद्यालयों के शिक्षकों ने पढ़ाने में पूरी मेहनत की है। - अशोक कुमार जुकरिया, सीईओ, पिथौरागढ़।
अटल उत्कृष्ट विद्यालय मेरिट से बाहर
चंपावत। जिले के चार ब्लॉकों में चार जीआईसी और चार जीजीआईसी को आदर्श (अटल उत्कृष्ट) कॉलेज का दर्जा दिया गया है, लेकिन सोमवार को घोषित हाईस्कूल और इंटर के बोर्ड परीक्षा के नतीजों में इन कॉलेजों का प्रदर्शन औसत रहा। ये कॉलेज कोई खास छाप छोड़ने में नाकाम रहे। प्रदेश की मेरिट में एक भी छात्र-छात्रा इन कॉलेजों का विद्यार्थी नहीं है। न कोई बड़ी लकीर और न कोई बड़ा आदर्श ये आदर्श स्कूल खड़ा कर सके। यहां के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से बड़ा कारण वहां स्टाफ और संसाधन की कमी होना है।
जिले में चंपावत, पाटी, पुलहिंडोला, चौड़ामोहता, चौमेल जीआईसी और टनकपुर, लोहाघाट, बाराकोट जीजीआईसी को अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा मिला है लेकिन इनमें से एक भी स्कूल में शत-प्रतिशत स्टाफ नहीं है। प्रवक्ताओं के 80 सृजित पदों में से एक-चौथाई, तो एलटी के 87 सृजित पदों में से 15 प्रतिशत पद खाली हैं। स्टाफ की कमी है। फर्नीचर भी नाकाफी है। भले ही स्कूलों में भवन ठीकठाक हैं।
अभी स्कूलवार परीक्षा परिणाम की समीक्षा की जाएगी। कमियों का पता लगाकर सुधार किया जाएगा। वैसे जिले का परीक्षा परिणाम प्रदेश के परीक्षा परिणाम से बेहतर रहा है। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में अगले साल से सीबीएसई पाठ्यक्रम से पढ़ाई होगी। - जितेंद्र सक्सेना, सीईओ, चंपावत।
ग्रामीण क्षेत्र के तीन स्कूलों ने मचाया धमाल
चंपावत। चंपावत जिले में तीन सरकारी इंटर कॉलेज के छात्र मेरिट में आए हैं, वे सभी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। दिगालीचौड़ जीआईसी के हर्षदीप जोशी ने इंटर में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में 25वां स्थान पाया। जीआईसी भिंगराड़ा के हिमांशु मिश्रा ने हाईस्कूल में 95.40 प्रतिशत अंक लाकर प्रदेश में 17वां नंबर, तो राजकीय हाईस्कूल पल्सों की सुनीता जोशी 93.80 प्रतिशत नंबर लाकर प्रदेश में 25वें नंबर पर रहीं। जीआईसी भिंगराड़ा के हाईस्कूल के रोहित सिंह ने 500 में से 475 अंक पाए। इसी कॉलेज के हिमांशु भट्ट ने इंटर में 500 में से 434 अंक लाकर मेरिट में जगह बनाई।
वीवीएमआईसी के 16 विद्यार्थी जिले में टॉप ट्वेंटी में
चंपावत। सरकारी स्कूल मजबूत आधारभूत ढांचा, ऊंचे वेतन और अन्य सुविधाओं के बावजूद बेहतर नहीं कर सकी, तो दूसरी ओर विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (वीवीएमआईसी) ने फिर मेरिट पर कब्जा किया। इस बार भी हाईस्कूल, इंटर की जिले की टॉप ट्वेंटी सूची में 20 में से 16 छात्र-छात्राएं इन्हीं विद्यालयों के हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद जिले के वीवीएमआईसी मेरिट में चमके हैं। हाईस्कूल में बनबसा, इंटर में टनकपुर के विद्यार्थी ने जिला टॉप किया। तो वहीं हाईस्कूल में लोहाघाट के चार, चंपावत के तीन छात्र मेरिट में आए जबकि इंटर में चंपावत के चार, लोहाघाट के तीन छात्र-छात्राएं मेरिट में आए। वीवीएमआईसी के प्रधानाचार्य सुरेशानंद जोशी ने बताया कि छात्र-छात्राओं की कमी का पता लगा दूर कर अतिरिक्त कक्षा लगाने से परीक्षार्थियों को लाभ होता है।