बरागाड़ से खतरे की जद में आया बासंबगड़ का खेतभराड़ गांव। संवाद
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नाचनी (पिथौरागढ़)। खेतभराड़ के डेढ़ दर्जन से अधिक घर खतरे की जद में हैं। इसके बाद भी सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए हैं। मानसूनकाल के नजदीक आते ही लोगों को डर सताने लगा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से वह सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग कर रहे हैं, इसके बाद भी उनकी मांग अनसुनी कर दी जा रही है।
अगस्त 2019 में बरागाड़ का जल स्तर बढ़ने से खेतभराड़ गांव के डेढ़ दर्जन आवासीय मकानों के अलावा मोटर पुल भी खतरे की जद में आ गया था। तब सांसद, विधायक, डीएम समेत कई अधिकारी, जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण कर सुरक्षात्मक कार्य करने का आश्वासन दिया था। तीन वर्ष के बाद भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं जिससे लोगों में नाराजगी है। बांसबगड़ ग्राम पंचायत से लगे गांव खेतभराड़ गांव के प्रभावित ध्यान सिंह, खड़क सिंह, जगदीश बिष्ट, गोविंद जोशी, हरीश सिंह टोलिया, अनिल टोलिया, पुष्कर सिंह का कहना है कि नेताओं और अधिकारियों ने हमें खतरे के मुहाने पर छोड़ दिया है। अब इन्हें हमारे घर और गांव को आपदा की भेंट चढ़ने का इंतजार है। सिंचाई विभाग ने बरागाड़ में आंशिक चैनलाइज और कुछ वायर क्रेट का निर्माण किया था, वह भी पहाड़ी से गिरे मलबे से पट गया है। आपदा काल में खेतभराड़ गांव को खतरा हो सकता है। ग्राम प्रधान भागीरथी देवी ने बताया कि आपदा को आए तीन वर्ष हो गए हैं। सरकार शासन और प्रशासन ने नाचनी, थल, धारचूला आदि जगहों में सुरक्षात्मक कार्य किए लेकिन उनके गांव की सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों के साथ देहरादून जाकर सीएम आवास पर धरना देंगे।
बांसबगड़ के बरागाड़ में खेतभराड़ गांव की सुरक्षा के लिए वर्ष 2020 में 350 मीटर सुरक्षा तटबंध का चार करोड़ बाइस लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। - फरजान खालिद, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, धारचूला।