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अब काली कुमाऊं के गुमदेश में तैयार होंगी घर बनाने की टिकाऊ ईंटें

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चंपावत के मटियानी में ईंट बनाने वाले प्रवासी हीरा कुमार और उनकी ओर से तैयार की गई ईंटें। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। कहते हैं कि कुछ कर दिखाने का जज्बा दिल में हो तो कोई भी काम असंभव नहीं होता है। यही कर दिखाया है चंपावत जिले के काली कुमाऊं के सीमांत गुमदेश क्षेत्र के हीरा कुमार ने। हीरा ने पर्वतीय क्षेत्र में असंभव समझे जाने वाले ईंट बनाने के काम में हाथ आजमाया और इसमें सफलता भी प्राप्त की है। उन्होंने गुमदेश क्षेत्र की मटियानी ग्राम पंचायत में घर बनाने में प्रयुक्त होने वाली ईंटों का निर्माण शुरू कर दिया है।
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डेढ़ वर्ष पूर्व कोरोना के कारण चंडीगढ़ से नौकरी को छोड़कर घर आए मटियानी निवासी 30 वर्षीय हीरा कुमार ने घर आकर स्वरोजगार के लिए कुछ हट कर करने की ठानी। काफी सोच विचार के बाद उन्होंने पर्वतीय क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री में प्रयुक्त होने वाली ईंटें स्थानीय स्तर पर ही तैयार करने का बीड़ा उठाया। हीरा कुमार ने बिना किसी तकनीकी सहायता के ईंट का सांचा तैयार कर खेत की मिट्टी से ईंट तैयार की। घर में ही खुद की कारीगरी से एक के बाद एक सुंदर और मजबूत ईंट बना रहे हैं। वह स्वयं से तैयार किए गए सांचे और भट्टी में दो घंटे के अंतराल में 100 से अधिक ईटें तैयार कर रहे हैं। (संवाद)
पहले अपने नए घर के लिए तैयार कर रहे ईंटें
चंपावत। अपने घर पर ही बिना किसी सहायता के ईंट तैयार करने की बात को लेकर हीरा का कहना है कि वह तीन बहनों और दो भाई में सबसे छोटा है। बचपन से ही उसके मन में कुछ अलग करने का विचार था। कोरोना काल में उन्हें सबसे मुफीद ईंट बनाना लगा। वह इस कार्य में जुट गया। धीरे-धीरे यह काम उसे अच्छा लगने लगा तो उसने अपने घर के लिए ईंट तैयार करनी शुरू कर दी। हीरा का कहना है कि अपने नए घर के लिए ईंट तैयार होने के बाद इसे वह उद्योग विभाग की मदद से अन्य लोगों को बेचने के लिए व्यावसायिक स्तर पर भी तैयार करेगा। (संवाद)
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कम खर्चे में बन रही हैं टिकाऊ और मजबूत ईंटें
चंपावत। मटियानी निवासी हीरा का कहना है कि वह बहुत कम खर्च में ईंट तैयार कर रहे हैं। ईंट के लिए मिट्टी वह अपने खेत से ले रहे हैं। जबकि सांचा घर में तैयार कर एक छोटी सी भट्टी घर के बाहर आंगन में लगाई गई है। उनका कहना है कि कम खर्च में किफायती ईंट तैयार करना ही उनका मकसद है। (संवाद)
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