चंपावत/लोहाघाट। 13 साल बाद भारत ने ओलंपिक में फिर कमाल कर दिया। 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में अभिनव बिंद्रा ने इतिहास रचा था और ओलंपिक के समापन से ठीक एक दिन पहले शनिवार को स्वर्णिम भाला फेंक नीरज चौपड़ा ने देश के लोगों को उल्लास में डूबो दिया।
गोल्डनबॉय के इस नायाब प्रदर्शन से गदगद खेल प्रेमी चंपावत, लोहाघाट सहित कई जगह खुशी से झूम उठे। चंपावत स्टेशन बाजार में श्याम पांडेय, कैलाश अधिकारी, एनडी गड़कोटी, हरीश जोशी, नंदन तड़ागी, विनोद चौधरी आदि ने आतिशबाजी कर जश्र मनाया। वहीं लोहाघाट में विजय बोहरा, चंद्रशेखर बगौली, नवीन बोहरा, खीम सिंह कुंवर, दीप चतुर्वेदी, मुकेश कुमार, दशरथ बोहरा, प्रदीप कलोनी, नरेश फर्त्याल, गिरीश महरा आदि ने जीत का उत्सव मनाया। खेल प्रेमियों ने कहा कि ये भारत में नई खेल संस्कृति के आगाज की आहट है।
ये भारत के लिए गौरव के पल है। ओलंपिक में न केवल भारत ने सोना जीता, बल्कि उनके इस पदक से ओलंपिक इतिहास का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन भी किया।
आरएस धामी,
जिला क्रीडाधिकारी, चंपावत।
व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में सोना और वह भी भाला फेंक में, एक बारगी तो यकीन नहीं हुआ। नीरज चौपड़ा ने सचमुच चमत्कार कर डाला।
सतीश जोशी, खेल प्रशिक्षक, टनकपुर।
अब हम क्रिकेट से आगे निकल गए हैं। दूसरे खेल भी क्रिकेट की राह पर चल दिए हैं। भाला फेंक में सोने के साथ ही टोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शन यादगार रहा।
एलएस पाटनी,
अध्यक्ष, चंपावत क्रिकेट एसोसिएशन।
भाला फेंक में उत्तराखंड ही नहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में रूझान खासा कम है। लेकिन नीरज चौपड़ा के सुनहरे प्रदर्शन ने इस कम लोकप्रिय खेल को आसमान पर पहुंचा दिया है।
ब्रजेश सिंह वल्दिया,
पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी, भाला फेंक, पिथौरागढ़।