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बंदरों के साथ अब लंगूर भी सक्रिय, कैसे हो खेती किसानी

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रानीखेत लालकुर्ती क्षेत्र में सक्रिय लंगूर। संवाद - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। वन्य जीवों के आतंक ने पर्वतीय कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है। पहले क्षेत्र में बंदर ही सक्रिय थे लेकिन अब लंगूरों का भी आतंक मचा हुआ है। सुबह स्कूल जाते बच्चों को भी लंगूरों के आतंक का भय सता रहा है। बंदरों के कारण पहले ही सब्जी उत्पादन का कार्य सिमट चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार खेती किसानी को बचाने के लिए तमाम सरकारी आयोजन करती है, लेकिन इनसे निजात दिलाने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं हो रहे हैं।
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ताड़ीखेत, सिलोर, ककलासौं, कंडारखुवा, धूराफाट पट्टी से जुड़े गांवों में बंदर, लंगूर और जंगली सूअरों ने खेती किसानी को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। मकड़ों, बिल्लेख सहित तमाम सब्जी उत्पादन के मशहूर इलाकों में आतंक के चलते सब्जी का उत्पादन सिमट चुका है। रानीखेत नगर, मालरोड, कुंपूर लालकुर्ती में भी आतंक से अछूता नहीं है। इन क्षेत्रों में बंदरों के साथ ही लंगूर भी सक्रिय होने से समस्या और बढ़ गई है। कुंपुर लालकुर्ती, चमड़खान आदि क्षेत्रों में लंगूर अधिक सक्रिय है। पन्याली निवासी शिवराज माहरा का कहना है कि जब तक वन अधिनियम के मानकों में शिथिलता नहीं की जाती, यह समस्या बदस्तूर जारी रहेगी।
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