फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पितृपक्ष की द्वितीया पर गुरु को किया नमन

विज्ञापन
विज्ञापन
पितरों के तर्पण के पखवारे में द्वितीया पर गुरु के निमित्त श्राद्ध किया गया। पिशाचमोचन पर श्रद्धालुओं ने त्रिपिंडी श्राद्ध किया और गंगा तट पर तर्पण किया गया। अस्सी से राजघाट के बीच सभी प्रमुख घाटों पर द्वितीया के श्राद्ध व तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। वहीं मठ-मंदिरों में भी गुुरु की स्मृति में विधान पूर्ण किए गए।
विज्ञापन

गंगा घाट पर बुधवार को सुबह ही तर्पण के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। मणिकर्णिका तीर्थ पर सतुआ बाबा के शिष्य महामंडलेश्वर संतोष दास ने अपने गुरु का श्राद्ध व तर्पण किया। आश्रम के शिष्यों के साथ संतोष दास ने अपने गुरु की निर्वाण तिथि पर विधि-विधान से तर्पण की क्रिया पूर्ण की। वहीं पिशाचमोचन कुंड पर पूर्वांचल समेत आसपास के राज्यों से श्रद्धालु त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए पहुंचे थे। सुबह से शुरू हुआ श्राद्ध का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। तीर्थ पुरोहितों ने बाहर से आए यजमानों का श्राद्धकर्म संपन्न कराया।
धनाभाव एवं समयाभाव में कैसे करें श्राद्ध
ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि पद्मपुराण में वर्णित है कि जातक अगर धनाभाव एवं समयाभाव में श्राद्ध तिथि पर पितर का स्मरण कर गाय को घास खिलाते हैं तो उसकी पूर्ति होती है। विष्णुपराण में कहा गया है कि अगर यह भी संभव न हो तो इसके अलावा भी श्राद्धकर्ता एकांत में जाकर पितरों का स्मरण कर दोनों हाथ जोड़कर पितरों से प्रार्थना करे। न मेस्ति वित्तं न धनम च नान्यच्छ्श्राद्धोपयोग्यम स्वपितृन्नतोस्मि। तृप्यन्तु भक्तया पितरो मयोतौ कृतौ भुजौ वर्तमनि मारुतस्य।। अर्थात हे पितृगण मेरे पास श्राद्ध हेतु न उपयुक्त धन है न धान्य है। मेरे पास आपके लिए हृदय में श्रद्धाभक्ति है। मैं इन्हीं के द्वारा आपको तृप्त करना चाहता हूं। आप तृप्त होइए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें