वाराणसी चौकाघाट फ्लाईओवर हादसे में 15 लोगों की मौत के मामले में सेतु निगम के बड़े पदों पर आसीन सात अधिकारियों की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि छोटे पदों पर तैनात कर्मचारियों और मजदूरों को गिरफ्तार कर कार्रवाई का कोरम पुलिस ने नहीं पूरा किया।
पुलिस की इस कार्रवाई से माना जा रहा है कि बड़ी परियोजनाओं के निर्माण कार्य से संबंधित कार्यदायी संस्थाएं सीख लेंगी और अब आगे घोर लापरवाही के कारण हादसे नहीं होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जानकारी और नजर में चौकाघाट फ्लाईओवर हादसा होने के कारण तफ्तीश कर रही क्राइम ब्रांच पर अतिरिक्त दबाव था।
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15 मई से 15 जुलाई के बीच मुख्यमंत्री जब भी जिले के दौरे पर आए, आला अधिकारियों से हादसे के संबंध में दर्ज मुकदमे को लेकर की गई कार्रवाई के बारे में जरूर पूछेे। सीएम योगी का साफ कहना था कि दोषी जो भी हो वो बचने ना पाए। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने 14 जुलाई की कचनार की जनसभा में फ्लाईओवर हादसे का जिक्र कर दुख जताया था। ऐसे में क्राइम ब्रांच के सामने यह चुनौती थी कि कार्रवाई ऐसी हो कि उस पर कहीं से अंगुली ना उठे और वो नजीर भी बने।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने शनिवार को आठ अहम आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ‘अमर उजाला’ से कहा कि हमें कोरम नहीं पूरा करना था बल्कि साक्ष्य के आधार पर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी थी। यह पूरी तरह से तकनीक से जुड़ा और पुलिस के लिए अनूठा मुकदमा था।
पुलिस ने इस मामले में सीबीआई की कार्य पद्धति का अनुसरण कर काम किया। लगभग 20 से 25 दिन पहले सीबीआरआई की तकनीकी रिपोर्ट हमें मिली थी। उसका अध्ययन कर सवालों की सूची तैयार की गई। इसके बाद सेतु निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और मजदूरों से दोबारा अलग-अलग पूछताछ की गई।
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पूछताछ में सेतु निगम के अधिकारियों ने गुमराह करने वाली ऐसी जानकारियां दी जो पूरी तरह से रिपोर्ट के विपरीत थी। इस बीच साक्ष्य एकत्र करने का हमारा काम जारी रहा। पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर लेने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इससे पहले उनकी नियमित निगरानी की जाती रही ताकि कोई शहर ना छोड़ने पाए। हमारे पास इतने पर्याप्त साक्ष्य हैं कि सारे आरोपियों को अदालत से कठोर सजा मिलेगी।